उत्तराखंड के श्रम आयुक्त कार्यालय ने राज्य के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन और उनके अधिकारों को लेकर कहा कि राज्य सरकार श्रमिकों की समस्याओं के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। साथ ही विभाग ने यह जानकारी भी दी कि अप्रैल माह में इंजीनियरिंग उद्योगों के लिए न्यूनतम वेतन और नॉन-इंजीनियरिंग क्षेत्रों के लिए महंगाई भत्ता (V.D.A) पहले ही घोषित किया जा चुका है, जिसके भुगतान के निर्देश भी उद्योगों को दे दिए गए हैं।
वर्तमान में उत्तराखंड में न्यूनतम वेतन पड़ोसी राज्यों की तुलना में अधिक निर्धारित है, जिसमें अकुशल श्रमिकों के लिए 13,800 रुपये, अर्धकुशल के लिए 15,100 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,900 रुपये तय किए गए हैं। श्रम विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि विभाग ने सभी औद्योगिक इकाइयों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे न्यूनतम वेतन, बोनस और ओवर टाइम जैसे नियमों का पूरी तरह पालन करें, ताकि श्रमिकों के हक और उनके हित की रक्षा हो सके।
शिकायतों के लिए कंट्रोल रूम की स्थापना
श्रम विभाग ने सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से चल रहे उस भ्रामक प्रचार का खंडन किया है जिसमें प्रतिदिन 781 रुपये वेतन की बात कही गई थी; विभाग ने स्पष्ट किया कि ऐसी कोई घोषणा प्रधानमंत्री या किसी सक्षम अधिकारी द्वारा राज्य के उद्योगों के लिए नहीं की गई है। 781 रुपये की दर केवल केंद्रीय उपक्रमों के सुरक्षा गार्डों के लिए है और यह राज्य के निजी उद्योगों पर लागू नहीं होती है।
विभाग ने श्रमिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और औद्योगिक शांति बनाए रखें । किसी भी समस्या या शिकायत के लिए हल्द्वानी स्थित श्रम आयुक्त कार्यालय में एक 24×7 कंट्रोल रूम बनाया गया है, जिसका दूरभाष नंबर 05946-282805 है । इसके अतिरिक्त, विभिन्न जिलों के सहायक श्रम आयुक्तों के नंबर भी जारी किए गए हैं ताकि श्रमिक सीधे उनसे संपर्क कर अपनी बात रख सकें और किसी भी शोषण से बच सकें।

