उत्तराखंड में मई के शुरुआती पखवाड़े में राज्य के भीतर बिजली उत्पादन बढ़ने के बावजूद ऊर्जा संकट की स्थिति गंभीर बनी हुई है। एनर्जी रिपोर्ट के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भीषण गर्मी और बढ़ती खपत के कारण बिजली की मांग उत्पादन की तुलना में कहीं अधिक तेजी से बढ़ रही है। 1 से 13 मई के बीच राज्य की औसत दैनिक मांग 44.37 मिलियन यूनिट दर्ज की गई, जबकि कुल उपलब्धता केवल 31.65 मिलियन यूनिट ही रही।
इसके परिणामस्वरूप प्रदेश को हर दिन औसतन 12.72 मिलियन यूनिट की कमी का सामना करना पड़ रहा है। ऊर्जा विभाग का मानना है कि पर्यटन सीजन और चारधाम यात्रा शुरू होने से व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है, जिससे मांग और आपूर्ति के बीच का संतुलन बिगड़ गया है।
चारधाम यात्रा के दबाव से मांग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
राज्य में बिजली की किल्लत का सबसे बड़ा कारण मैदानी क्षेत्रों में बढ़ता तापमान और पहाड़ों में पर्यटकों की भारी आमद है। स्थिति यह है कि कई दिनों में बिजली की मांग 49 मिलियन यूनिट के आंकड़े को भी पार कर गई है, जिससे अकेले 13 मई को ही 15 मिलियन यूनिट से अधिक की कमी दर्ज की गई।
इस भारी कमी को पूरा करने के लिए सरकार को बिजली एक्सचेंज और खुले बाजार का सहारा लेना पड़ रहा है, जिसके तहत महज 13 दिनों के भीतर ही लगभग 192 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि ऊर्जा निगम ने कुशल ग्रिड प्रबंधन और बाजार से बिजली की खरीद सुनिश्चित कर अब तक किसी भी प्रकार की आपातकालीन कटौती या रोस्टिंग नहीं होने दी है, जिससे उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति मिल रही है।

