उत्तराखंड सरकार राज्य में प्रदूषण कम करने और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति लागू करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की है कि खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और तेल-गैस के वैश्विक संकट को देखते हुए राज्य सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने पर विशेष जोर दे रही है। इस नई नीति का उद्देश्य न केवल पर्यावरण की रक्षा करना है, बल्कि आम जनता को आर्थिक राहत प्रदान करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना भी है। सरकार का लक्ष्य आगामी कैबिनेट बैठक में इस नीति को मंजूरी दिलाकर इसे जल्द से जल्द धरातल पर उतारना है।
नई नीति की मुख्य विशेषताएं और लाभ
इस आगामी नीति के अंतर्गत राज्य सरकार इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले नागरिकों को आकर्षक सब्सिडी और रियायती दरों पर लोन की सुविधा प्रदान करेगी। इसके साथ ही, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए मॉल्स, बड़े संस्थानों और होटलों में ई-चार्जिंग स्टेशन बनाना अनिवार्य किया जाएगा। सरकारी कार्यालयों में भी धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों का अनुपात बढ़ाया जाएगा ताकि सरकारी स्तर पर इसकी शुरुआत हो सके। जो कंपनियां ईवी निर्माण के क्षेत्र में निवेश करेंगी, उन्हें भी सरकार विशेष प्रोत्साहन और छूट देगी। वर्तमान में पंजीकरण और रोड टैक्स में मिलने वाली छूट को और भी अधिक आकर्षक बनाया जा रहा है ताकि लोग डीजल-पेट्रोल वाहनों के बजाय ई-वाहनों को प्राथमिकता दें।
रोजगार और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव
मुख्यमंत्री के अनुसार, इस नीति से राज्य में औद्योगिक निवेश बढ़ेगा, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी, जिससे तेल आयात का आर्थिक दबाव घटेगा और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी यह एक बड़ा कदम साबित होगा क्योंकि ई-वाहनों के संचालन से प्रदूषण के स्तर में भारी गिरावट आएगी। इसके अतिरिक्त, ऊर्जा संसाधनों की बचत के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए सूचना विभाग में हर शनिवार को ‘नो व्हीकल डे’ मनाने का भी निर्णय लिया गया है, जो एक जिम्मेदार समाज की ओर इशारा करता है।

