उत्तराखंड शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला, DIET से मूल स्कूलों में भेजे जाएंगे अयोग्य शिक्षक

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उत्तराखंड के शिक्षा विभाग ने राज्य के शैक्षिक ढांचे को सुदृढ़ करने और पदों की गरिमा बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया है। शिक्षा सचिव रविनाथ रमन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, प्रदेश के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIET) में कार्यरत उन शिक्षकों को वापस उनके मूल विद्यालयों में भेजा जाएगा जो अपने वर्तमान पद के अनुरूप निर्धारित योग्यता नहीं रखते हैं।

शासन का मानना है कि उच्च स्तरीय प्रशिक्षण संस्थानों में केवल उन्हीं विशेषज्ञों और प्रवक्ताओं की तैनाती होनी चाहिए जो उस पद के लिए शैक्षणिक रूप से पूरी तरह पात्र हों। इस कदम से न केवल संस्थानों की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि शिक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित की जा सकेगी।

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पदों का समायोजन और प्रतिनियुक्ति की नई व्यवस्था

शिक्षा सचिव के निर्देशों के तहत उन जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जहाँ सृजित पदों की तुलना में अधिक प्रवक्ता कार्यरत हैं। ऐसे मामलों में अतिरिक्त प्रवक्ताओं को विभाग के अंतर्गत अन्य खाली पड़े पदों पर समायोजित किया जाएगा।

साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया है कि जब तक इन खाली पदों पर नियमित नियुक्तियां नहीं हो जातीं, तब तक शिक्षा के स्तर को बनाए रखने के लिए प्रतिनियुक्ति के माध्यम से योग्य शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी संस्थान में कार्यभार प्रभावित न हो और योग्य व्यक्तियों को ही प्रशिक्षण की जिम्मेदारी मिले।

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नियमों की अनुपलब्धता और शिक्षकों का विरोध

शासन के इस आदेश के बाद शिक्षक वर्ग के भीतर असंतोष और तकनीकी आपत्तियों का स्वर भी उभरने लगा है। कई शिक्षकों का तर्क है कि साल 2013 के शासनादेश के बावजूद, राज्य सरकार ने अभी तक राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों के लिए स्पष्ट नियमावली तैयार नहीं की है।

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शिक्षकों का कहना है कि बिना किसी ठोस नियमावली के इस तरह का स्थानांतरण आदेश जारी करना तर्कसंगत नहीं है। इस प्रशासनिक निर्णय ने विभाग और शिक्षकों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है, जहाँ एक ओर शासन गुणवत्ता का हवाला दे रहा है, वहीं दूसरी ओर शिक्षक नियमों की कमी को आधार बना रहे हैं।

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