देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र रावत ने गुरुवार को देवस्थानम बोर्ड की एक बार फिर पैरवी की। उन्होंने कहा कि यदि देवस्थानम बोर्ड होता तो आज चढ़ावे को लेकर जो समस्याएं सामने आ रही हैं, वे नहीं आतीं। रावत ने मंदिर समिति से जुड़े मंदिरों की व्यवस्था सुधारने के लिए बोर्ड गठन पर जोर दिया।
त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। दोषियों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए। उन्होंने देवस्थानम बोर्ड को मंदिरों की बेहतर व्यवस्था का माध्यम बताया।
पूर्व सीएम ने कहा कि जहां मंदिर समितियों या सरकारी व्यवस्था है, वहां भ्रष्टाचार के मामले सामने आते हैं। वहीं जहां तीर्थ पुरोहित और हकहकूकधारी व्यवस्था है, वहां शिकायतें कम हैं। उन्होंने गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर को उदाहरण दिया।
बीकेटीसी और देवस्थानम बोर्ड पर भ्रष्टाचार के आरोप
महासचिव बृजेश सती ने कहा कि बीकेटीसी और पूर्व में देवस्थानम बोर्ड भ्रष्टाचार के अड्डे साबित हुए हैं। धामों और मंदिरों में जहां सरकारी व्यवस्था है, वहां भ्रष्टाचार के मामले बार-बार सामने आए हैं।
त्रिवेंद्र रावत ने दोहराया कि देवस्थानम बोर्ड के गठन से मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी। चढ़ावे की व्यवस्था को सुधारने के लिए यह बोर्ड जरूरी है।
उत्तराखंड में देवस्थानम बोर्ड को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। त्रिवेंद्र रावत का ताजा बयान इस बहस को नई दिशा देता है। उन्होंने बोर्ड के गठन से धार्मिक स्थलों की व्यवस्था बेहतर होने का दावा किया।
महासचिव बृजेश सती ने कहा कि जहां तीर्थ पुरोहित व्यवस्था है, वहां शिकायतें न के बराबर हैं। उन्होंने बीकेटीसी में भ्रष्टाचार के मामलों का जिक्र किया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उनका बयान मंदिर प्रबंधन और चढ़ावे की पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों के बीच महत्वपूर्ण है।
यह मुद्दा उत्तराखंड की राजनीति और धार्मिक गतिविधियों में गहराई से जुड़ा हुआ है। त्रिवेंद्र रावत के बयान से देवस्थानम बोर्ड पर चर्चा एक बार फिर से तेज हो गई है।

