उत्तराखंड में हाकिमों का गजब रुतबा; जिला नहीं, जागीर मिल गई !

ख़बर शेयर करें

कहते हैं लोकतंत्र में जनता की सेवा के लिए ही जन सेवकों को तैनात किया जाता हैं लेकिन उत्तराखंड में कुछ जिलाधिकारियों को लगता है कि वे ही जिले में भगवान है। उन्हें आजाद भारत में अपनी हाकिमी के रूआब पर इतना गुमान है जिनता ब्रितानी दौर के हिंदुस्तान में वायसराय को भी नहीं होता था।

इतिहास की किताबे बताती है कि ब्रितानी हिंदुस्तान में काफी अंग्रेज अफसर जनता की फरियाद को तरजीह देते थे उनकी बात सुनते थे लेकिन आजाद भारत के उत्तराखंड में जिले के हाकिमो का ये हाल है कि, वो फोन उठाने में भी तौहीन समझते हैं।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज: 6 से 11 अक्टूबर तक येलो अलर्ट जारी, बर्फबारी के भी आसार

जिले में तैनात जिलाधिकारियों को गुमान है कि, सरकार उन्हें जनता के पैसे से मोटी पगार सिर्फ इसलिए देती है कि वे यूपीएससी का इम्तिहान पास कर अफसर बने हैं। ऐसे में उन्हें जनता से क्या सरोकार, वे तो सिर्फ हुक्म बजाने के लिए कुर्सी पर बैठे हैं, आवाम की जिम्मेदारियां उठाने के लिए नहीं।

गजब तो ये हैं राज्य के मुख्यमंत्री खुद को जनता का प्रधान सेवक मान रहे हैं लेकिन जिले के हाकिम अपने आपको साहब मान रहे हैं। सीएम कह चुके हैं कि जनता के साथ जिलाधिकारी सीधा संवाद करें बावजूद इसके कई जिलाधिकारी ऐसे हैं जिन्होंने सीएम को आदेश को ठेंगा पर रखा हुआ है। सूबे के चौक-चौराहों पर जिलाधिकारियों के अंदाज की ही चर्चा है बावजूद इसके हाकिम है कि समझते नहीं।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड: सीएम धामी ने नानकमत्ता साहिब में किया श्रमदान, 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत दिया स्वच्छता का संदेश

कुछ जिलों के जिलाधिकारी तो ऐसे हो गए है जैसे उन्हें जन सरकारों के लिए बल्कि उनकी खुद की जरूरतों के हिसाब से रखा गया है। खबर है कि साहब लोग लोकसेवक होने के बावजूद आम आदमी का फोन नहीं उठाते। जबकि सरकारी फोन का बिल जनता भरती है उनकी कार हो या पगार हर एक का इंतजाम जनता करती है।

यह भी पढ़ें -  नैनीताल: ज्योलीकोट में दूध से भरा ट्रक 200 फीट गहरी खाई में गिरा, चालक ने सूझबूझ से बचाई जान

ऐसे में सवाल उठता है जब जिले के हाकिमों ने जिले की जनता के फोन से ही परहेज है तो उन्हें जिले की जनता की तकलीफ कैसे पता चलेगी। सवाल ये है भी है कि जब हाकिम ही अवाम से दूरी बढ़ाएगा, तो जनता सरकार के करीब कैसे रहेगी ? हजूर बेलगामों पर नजर रखने और लगाम कसने की दरकार है, कहीं आपके माझी बनाए अफसर नैय्या न डुबो दें!