आम जनता पर फिर बढ़ सकता है महंगाई का बोझ, घरेलू LPG सिलेंडर के दाम और बढ़ने की आशंका

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पश्चिम एशिया में जारी गहरे भू-राजनीतिक संकट के बीच देश के आम उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगाई का बड़ा झटका लग सकता है। पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में भारी उछाल के बाद अब घरेलू एलपीजी रसोई गैस सिलेंडर के दामों में और अधिक बढ़ोतरी होने की गंभीर आशंका बनी हुई है।

हाल ही में तेल कंपनियों द्वारा की गई ताज़ा 29 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी के बाद भी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों का घाटा कम नहीं हुआ है, जिससे आने वाले दिनों में कीमतें फिर से बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। दरअसल, अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पैदा हुए गतिरोध के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है।

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इस वैश्विक संकट की वजह से एलपीजी का अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ‘सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस’ फरवरी के बाद से लगभग 46 प्रतिशत तक बढ़ चुका है। इसके परिणामस्वरूप, भारत में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति की वास्तविक लागत अब बढ़कर 1,600 रुपये से भी अधिक हो चुकी है, जबकि पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, वर्तमान में सरकार और तेल कंपनियों को प्रति घरेलू गैस सिलेंडर पर करीब 700 रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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इस बीच, केंद्र सरकार ने रसोई गैस की कीमतों में की जा रही इस बढ़ोतरी के फैसले का पुरजोर बचाव किया है। सरकार की दलील है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और रसोई गैस की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल आने के बावजूद, भारत में एलपीजी रसोई गैस दुनिया के कई अन्य विकासशील और विकसित देशों के मुकाबले काफी सस्ती और नियंत्रित दरों पर मिल रही है।\

हालांकि, अमेरिका और पश्चिम एशिया के इस त्रिकोणीय तनाव के बीच घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में यह लगातार दूसरी बड़ी वृद्धि है, जिसके चलते हाल-फिलहाल में ही उपभोक्ताओं की जेब पर कुल 89 रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ चुका है। यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और गैस के दाम इसी तरह ऊंचाइयों पर बने रहे, तो तेल कंपनियों के बढ़ते अंडर-रिकवरी को पाटने के लिए सरकार को मजबूरन सब्सिडी में कटौती या कीमतों में और इजाफा करने जैसे कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं, जो सीधे तौर पर आम आदमी के मासिक बजट को बिगाड़ देगा।

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