थराली। उत्तराखंड का स्वास्थ्य महकमा इन दिनों अपनी बदहाली की कहानी खुद लिखता नजर आ रहा है। एक ओर सरकार और विभाग पहाड़ तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, तो दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों की परतें उधेड़ रही है। चमोली जिले के थराली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गर्भवती महिला की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पहाड़ के लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं क्यों नहीं मिल पा रही हैं?
महिला की मौत के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में लोगों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रदर्शन कर स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, लापरवाह चिकित्सा कर्मियों पर कार्रवाई करने और अस्पताल में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि थराली जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में आज भी अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी जांच सुविधा उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी बनी हुई है। गर्भवती महिलाओं को छोटी-छोटी जांच के लिए भी कई किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय या अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। ऐसे में समय पर इलाज न मिलने से मरीजों की जान पर बन आती है।
विडंबना यह है कि स्वास्थ्य विभाग हर साल नए भवन, मशीनों और व्यवस्थाओं के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करता है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर ये संसाधन किन क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं? पहाड़ के अस्पताल आज भी डॉक्टरों, विशेषज्ञों, तकनीशियनों और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों के अभाव से जूझ रहे हैं। विकास का पहिया अक्सर उन्हीं स्थानों पर घूमता दिखाई देता है जहां पहले से सुविधाएं मौजूद हैं, जबकि दुर्गम क्षेत्रों के लोग आज भी मूलभूत स्वास्थ्य सेवाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
थराली की घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते अस्पताल में आवश्यक संसाधन, विशेषज्ञ चिकित्सक और जांच सुविधाएं उपलब्ध होतीं, तो शायद यह घटना टाली जा सकती थी। यही सवाल अब स्थानीय जनता भी उठा रही है।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की है कि थराली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्थायी रूप से स्त्री रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, अल्ट्रासाउंड सुविधा और पर्याप्त चिकित्सा स्टाफ की तत्काल नियुक्ति की जाए। साथ ही गर्भवती महिला की मौत की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
थराली की यह घटना केवल एक अस्पताल की कहानी नहीं है, बल्कि पहाड़ की स्वास्थ्य व्यवस्था की उस हकीकत का आईना है जिसे सरकारी फाइलों में अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। अब देखना होगा कि सरकार इस घटना को सिर्फ एक आंकड़ा मानकर आगे बढ़ जाती है या फिर इसे पहाड़ की स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने का अवसर बनाती है।

