स्वास्थ्य महकमे में तबादलों का ‘महाप्रयोग’! व्यवस्था सुधार या सिस्टम से खिलवाड़?”

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देहरादून। उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग में हाल ही में हुए बंपर तबादले अब महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि बड़े विवाद का विषय बन गए हैं। विभाग की ओर से जारी स्थानांतरण सूची के बाद स्वास्थ्य महकमे के भीतर चर्चाओं का बाजार गर्म है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या तबादले तय नियमों और प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर हुए हैं या फिर पूरी कवायद बिना पर्याप्त मानवीय और प्रशासनिक समीक्षा के अंजाम दे दी गई?

महकमे के भीतर यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि इतनी बड़ी तबादला सूची तैयार करने में A I का सहारा लिया गया और व्यक्तिगत परिस्थितियों, प्रशासनिक अनुभव तथा विभागीय जरूरतों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। भले ही इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन तबादलों को लेकर उठ रहे सवाल विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर बहस जरूर खड़ी कर रहे हैं।

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सबसे अधिक चर्चा उन अधिकारियों के तबादलों को लेकर है जिन्होंने सरकारी खर्च पर अस्पताल प्रबंधन और प्रशासनिक कार्यों का विशेष प्रशिक्षण एवं उच्च शिक्षा प्राप्त की। ऐसे अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन, अस्पताल प्रबंधन और नीतिगत जिम्मेदारियों के लिए तैयार किया गया था। लेकिन अब उनमें से कई को प्रशासनिक जिम्मेदारियों से हटाकर फिर से आईसीयू और अन्य चिकित्सकीय इकाइयों में भेज दिया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि प्रशिक्षित अधिकारियों को उनके विशेषज्ञता वाले कार्यों में ही नहीं लगाया जाएगा तो सरकारी धन और प्रशिक्षण का उद्देश्य क्या रह जाएगा?

चुनावी वर्ष में यह उम्मीद जताई जा रही थी कि स्थानांतरण प्रशासनिक संतुलन और जनहित को ध्यान में रखकर किए जाएंगे। लेकिन एक ही सूची में बड़े पैमाने पर फेरबदल ने कई अस्पतालों और स्वास्थ्य इकाइयों की कार्यप्रणाली को प्रभावित करने की आशंका बढ़ा दी है। महकमे के जानकारों का मानना है कि एक साथ इतने बड़े स्तर पर प्रशासनिक बदलाव से व्यवस्थाएं अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती हैं और निर्णय लेने की प्रक्रिया भी धीमी पड़ सकती है।

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इधर चिकित्सक संघ ने भी स्थानांतरण प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मुख्य सचिव को ज्ञापन भेजा है। संघ का आरोप है कि तबादले राज्य की स्थानांतरण नीति के विपरीत किए गए हैं। कई ऐसे चिकित्सकों का भी तबादला कर दिया गया जो स्वयं दुर्गम क्षेत्रों में सेवा देना चाहते थे। वहीं कुछ डॉक्टर ऐसे भी हैं जिनके परिवार में दिव्यांग बच्चे हैं या अन्य विशेष परिस्थितियां हैं, लेकिन उनकी मानवीय और संवेदनशील परिस्थितियों को भी नजरअंदाज कर दिया गया।

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चिकित्सक संघ का कहना है कि यदि स्थानांतरण नीति में निर्धारित मानकों और मानवीय आधारों का पालन नहीं किया गया तो इससे कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित होगा और इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा। संघ ने सरकार से पूरे मामले की समीक्षा कर नियमों के विपरीत हुए स्थानांतरण निरस्त करने की मांग की है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या स्वास्थ्य विभाग ने तबादलों में पारदर्शिता, नीति और व्यावहारिक जरूरतों का संतुलन बनाया या फिर जल्दबाजी में लिया गया फैसला भविष्य में स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए नई मुश्किलें खड़ी करेगा? फिलहाल इस तबादला सूची ने विभाग के भीतर कई सवाल छोड़ दिए हैं, जिनके जवाब सरकार और स्वास्थ्य महकमे को देने होंगे।

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