देश से खत्म होगी नकली दवाओं की बिक्री, सरकार ने क्यूआर कोड आधारित ट्रैकिंग का दायरा बढ़ाया

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केंद्र सरकार ने देश में नकली और घटिया दर्जे की दवाओं की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है, जिसके तहत अब क्यूआर कोड आधारित प्रणाली के दायरे को बढ़ा दिया गया है। नए प्रावधानों के मुताबिक, अब कैंसररोधी, टीके, सूक्ष्मजीवरोधी और मनःप्रभावी दवाओं की पैकेजिंग पर क्यूआर कोड या बारकोड लगाना पूरी तरह से अनिवार्य होगा।

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने औषधि नियमावली, 1945 में इस बदलाव को अधिसूचित करते हुए इन श्रेणियों की दवाओं को अनुसूची एच2 में शामिल किया है। इस नए नियम के तहत, दवा निर्माताओं को दवा की प्राथमिक पैकेजिंग लेबल पर, या फिर जगह की कमी होने पर द्वितीयक पैकेजिंग पर क्यूआर कोड लगाना होगा।

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इस क्यूआर कोड में उत्पाद का अनूठा पहचान कोड, जेनेरिक और ब्रांड नाम, कंपनी का नाम-पता और बैच नंबर जैसी सभी जरूरी और महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज होंगी, जिससे आम लोग और स्वास्थ्य विशेषज्ञ आसानी से दवा की प्रामाणिकता की जांच और सत्यापन कर सकेंगे कि दवा असली है या नकली।

मंत्रालय ने इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की समयसीमा तय की है, जिसमें टीके, मादक पदार्थ, मनोरोग और कैंसररोधी दवाओं से जुड़े प्रावधान 1 जुलाई, 2027 से लागू होंगे, जबकि रोगाणुरोधी दवाओं से जुड़े प्रावधान 1 जुलाई, 2028 से प्रभावी होंगे, जो नियम पहले देश के सिर्फ शीर्ष 300 फार्मास्युटिकल ब्रांड पर ही लागू होता था।

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