नैनीताल: रामनगर के पूछड़ी क्षेत्र में अतिक्रमण पर बड़े एक्शन की तैयारी, 900 पुलिसकर्मी और बुलडोजर तैनात

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नैनीताल। उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर स्थित पूछड़ी क्षेत्र में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन ने अब तक का सबसे बड़ा बेदखली अभियान चलाने की तैयारी कर ली है। मौके पर कई बुलडोजर तैनात कर दिए गए हैं और सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए लगभग 900 पुलिसकर्मियों का भारी बल लगाया गया है। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की टीमों ने रामनगर डिग्री कॉलेज में डेरा डालकर पूरे ऑपरेशन की रणनीति तैयार करना शुरू कर दिया है।

बेदखली अभियान के इस दूसरे चरण को पूरा करने के लिए नैनीताल जिले के अलग-अलग थानों और विशेष पुलिस इकाइयों से अतिरिक्त जवानों को बुलाया गया है। रामनगर डिग्री कॉलेज को अस्थायी कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां से पूरे बल का संचालन किया जाएगा। हालांकि, प्रशासन की ओर से कार्रवाई शुरू होने की सटीक तारीख और समय को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं की गई है।

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अभियान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर क्षेत्र में मीडिया की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए जाने की आशंका भी जताई जा रही है। ऐसे में स्थानीय निवासियों और मीडिया जगत की ओर से मांग की जा रही है कि प्रशासन पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखे और निष्पक्ष रिपोर्टिंग का अवसर दे।

इस पूरी प्रशासनिक हलचल के बीच सबसे बड़ा संकट उन सैकड़ों स्थानीय परिवारों पर मंडरा रहा है, जो दशकों से यहां रहकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। बुलडोजर की आहट और बेदखली की आशंका से क्षेत्र के परिवारों में गहरा डर और अनिश्चितता का माहौल है।

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अतिक्रमण रोधी कार्रवाई की खबर के बाद से स्थानीय निवासियों के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है। लोगों को सबसे ज्यादा चिंता अपने बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की चिकित्सा जरूरतों और रोजमर्रा की रोजी-रोटी की सता रही है। प्रभावित लोगों का कहना है कि बिना किसी ठोस इंतजाम के बेघर किए जाने से उनका जीवन पूरी तरह तबाह हो जाएगा।

सरकारी और कानूनी नजरिए से वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना प्रशासन और वन विभाग का अनिवार्य दायित्व है। लेकिन इसके साथ ही प्रभावित हो रहे नागरिकों के बुनियादी मानवाधिकारों और व्यावहारिक परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

क्षेत्रीय लोगों का सवाल है कि क्या प्रशासन ने बेघर होने वाले परिवारों के लिए किसी वैकल्पिक व्यवस्था या पुनर्विकास योजना का खाका तैयार किया है। विशेषकर महिलाओं, छोटे बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों की आपात जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राहत इंतजामों की स्थिति अभी तक स्पष्ट नहीं है।

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स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि यदि बेदखली की कार्रवाई अपरिहार्य है, तो उन्हें अपना जरूरी घरेलू सामान, राशन और महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित निकालने का पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

फिलहाल, पूछड़ी में प्रस्तावित इस बड़े एक्शन पर पूरे उत्तराखंड की नजरें टिकी हुई हैं। एक तरफ 900 जवानों का कड़ा सुरक्षा घेरा और गरजने के लिए तैयार बुलडोजर हैं, तो दूसरी तरफ आशियाना बचाने की गुहार लगाते बेबस परिवार। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस कानूनी कार्रवाई को मानवीय संवेदनाओं के साथ कैसे आगे बढ़ाता है।