उत्तराखंड में आगामी मानसून सीजन को देखते हुए शासन स्तर पर आपदा प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इसी सिलसिले में प्रमुख सचिव डॉ. आर मीनाक्षी सुंदरम की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें उन्होंने जिले के सभी 12 चिन्हित भूस्खलन जोनों पर मानसून शुरू होने से पहले विशेष ध्यान देने और इनके स्थायी समाधान खोजने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की मौजूदगी में हुई इस बैठक में किमाड़ी सहित सभी संवेदनशील क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने और बादल फटने की संभावना वाले इलाकों में निगरानी व पूर्व चेतावनी तंत्र को और अधिक सुदृढ़ करने की बात कही गई।
बैठक में सोंग नदी परियोजना, नंदा की चौकी क्षेत्र में चल रहे सुरक्षा कार्यों और बाढ़ सुरक्षा से जुड़े सभी लंबित कामों को प्राथमिकता के आधार पर समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही, शहरी क्षेत्रों में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए 39 डी-वॉटरिंग पंपों की तैनाती की योजना की समीक्षा की गई। बैठक में सुरक्षा के लिहाज से नदी-नालों के किनारे स्थित 89 स्कूलों को चिन्हित किया गया है।
इसके अतिरिक्त, जिले के 73 ऐसे गांवों की पहचान की गई है जहां मानसून के दौरान कनेक्टिविटी प्रभावित हो जाती है प्रशासन ने ऐसी जगहों की गर्भवती महिलाओं को समय से पहले ही नजदीकी चिकित्सालयों में भर्ती कराने की विशेष व्यवस्था की है, जहां उनके और तीमारदारों के भोजन का खर्च विभाग उठाएगा।

