केदारनाथ धाम में शुरू हुआ ‘ऑपरेशन कालनेमि’, फर्जी साधुओं की होगी पहचान और सत्यापन

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केदारनाथ धाम की पवित्रता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने एक विशेष अभियान ‘ऑपरेशन कालनेमि’ शुरू किया है। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा के निर्देश पर पुलिस अब धाम में आने वाले सभी साधु-संतों का सत्यापन करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य उन संदिग्ध लोगों को पकड़ना है जो साधु का भेष धरकर धाम में प्रवेश कर रहे हैं। इसके साथ ही, मंदिर के ठीक सामने बैठने वाले साधुओं को भी अब अन्य निर्धारित स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया है ताकि यात्रियों को दर्शन में कोई असुविधा न हो और धाम की मर्यादा बनी रहे।

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ऑपरेशन कालनेमि का उद्देश्य

प्रशासन ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि कोई भी संदिग्ध व्यक्ति साधु का रूप धारण करके मंदिर परिसर में अव्यवस्था न फैला सके। पुलिस को लिखित निर्देश दिए गए हैं कि वे गहराई से जांच करें और केवल वास्तविक साधु-संतों को ही सम्मानपूर्वक रहने दें। संदिग्धों की धरपकड़ के लिए पुलिस लगातार सक्रिय है।

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मंदिर परिसर की नई व्यवस्था

अक्सर देखा गया है कि मंदिर के बिल्कुल सामने कई साधु भिक्षावृत्ति (भीख मांगना) करते हैं, जिसे प्रशासन ने धाम की गरिमा के अनुकूल नहीं माना है। जिलाधिकारी के अनुसार, इससे आने वाले श्रद्धालुओं के बीच गलत संदेश जाता है। अब इंस्पेक्टर कुलदीप पंत के नेतृत्व में पुलिस ने सभी साधुओं को मंदिर के सामने से हटाकर भीम शिला के पास एक तय स्थान पर बैठा दिया है।

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सुविधा और सम्मान का ध्यान

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल सुरक्षा के लिए है, न कि संतों के अपमान के लिए। प्रशासन का कहना है कि वे वास्तविक साधु-संतों की सुविधा और उनके सम्मान का पूरा ध्यान रखेंगे, लेकिन धाम की व्यवस्थाओं में किसी भी तरह की कमी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।