नई दिल्ली।देश में नए मेडिकल कॉलेज खोलने और उनके संचालन को लेकर राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने नियमों में बड़े और कड़े बदलावों का एलान कर दिया है। एनएमसी के नए प्रस्तावित मसौदे के अनुसार, अब किसी भी निर्माणाधीन इमारत, आधे-अधूरे अस्पताल या अस्थाई व्यवस्था के सहारे नए मेडिकल कॉलेज को मंजूरी नहीं मिलेगी।
आयोग के इस ऐतिहासिक फैसले का सीधा असर देश के हजारों मेडिकल छात्रों, नए निजी संस्थानों और इलाज के लिए आने वाले मरीजों पर पड़ेगा, ताकि उन्हें शुरुआत से ही विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल सकें।
एनएमसी ने इसके लिए ‘चिकित्सा संस्थानों की स्थापना, नए पाठ्यक्रम, सीट वृद्धि, मूल्यांकन एवं रेटिंग विनियम-2026’ का आधिकारिक मसौदा जारी किया है। इस नए नीतिगत मसौदे पर आयोग ने सभी हितधारकों, विशेषज्ञों और आम जनता से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
इस नए संशोधन का मुख्य उद्देश्य मेडिकल शिक्षा की गिरती गुणवत्ता को सुधारना और मरीजों के लिए बेहतर इलाज सुनिश्चित करना है। अब से नया कॉलेज खोलने के लिए पूरी इमारत, सुसज्जित अस्पताल और सभी बुनियादी संसाधन पहले दिन से ही पूरी तरह तैयार होने अनिवार्य होंगे।
कमियां मिलीं तो सीधे खारिज होगा प्रस्ताव
एनएमसी ने नए मेडिकल कॉलेजों की आवेदन प्रक्रिया को भी पहले से कई गुना अधिक पारदर्शी और कड़ा बनाने का प्रस्ताव रखा है। अब कॉलेज खोलने के लिए आवेदन करते समय ही सभी जरूरी और वैध दस्तावेजों को जमा करना अनिवार्य होगा। यदि कोई संस्थान बिना जरूरी दस्तावेजों या अधूरी तैयारी के साथ आवेदन करता है, तो उसे अपनी कमियां सुधारने का कोई अतिरिक्त मौका नहीं दिया जाएगा।
नियमों के मुताबिक, अधूरे या संदिग्ध दस्तावेजों वाले आवेदनों को बिना किसी देरी के सीधे तौर पर खारिज कर दिया जाएगा। जो परियोजनाएं अभी निर्माणाधीन हैं या जहां अस्थाई व्यवस्था की गई है, उनके आवेदनों पर आयोग आगे कोई विचार ही नहीं करेगा।
पुराने कॉलेजों को भी बनाना होगा विशेष ‘कॉर्प्स फंड’
एनएमसी का यह नया शिकंजा केवल नए स्थापित होने वाले कॉलेजों पर ही नहीं, बल्कि देश भर में पहले से चल रहे सभी मेडिकल कॉलेजों पर भी कसेगा। नियमों के तहत अब सभी मौजूदा मेडिकल कॉलेजों को एक समर्पित कॉर्प्स फंड बनाना और उसे सुरक्षित रखना होगा।
यह कॉर्प्स फंड एक ऐसा सुरक्षित बैंक रिजर्व होगा, जिसका इस्तेमाल केवल कॉलेज की शैक्षणिक गतिविधियों और अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारू संचालन के लिए ही किया जा सकेगा। इस फंड की कुल राशि का निर्धारण ‘मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड’ द्वारा किया जाएगा।
एनएमसी के निरीक्षण के दौरान कॉलेजों को इस फंड की उपलब्धता के पुख्ता प्रमाण पेश करने होंगे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी कॉलेज में पैसे की कमी या वित्तीय संकट के चलते छात्रों की पढ़ाई और मरीजों का इलाज प्रभावित न हो।

