उत्तराखंड में मोरिंगा फार्मिंग से बदलेगी किसानों की किस्मत, पायलट प्रोजेक्ट की तैयारी शुरु

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उत्तराखंड सरकार राज्य में किसानों की आय बढ़ाने के लिए सहजन (मोरिंगा) की खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की योजना बना रही है। कृषि मंत्री गणेश जोशी की अध्यक्षता में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश के भीतर मोरिंगा उत्पादन की संभावनाओं को तलाशने और इसे एक आय बढ़ाने वाले विकल्प के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया। सहजन अपने औषधीय गुणों के कारण स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत लाभकारी माना जाता है और वर्तमान में इसकी मांग देश के साथ-साथ विदेशों में भी तेजी से बढ़ रही है, जिससे यह उत्तराखंड के किसानों के लिए आर्थिक मजबूती का एक नया जरिया बन सकता है।

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देहरादून में पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की योजना

कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि देहरादून जिले में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर मोरिंगा की खेती और इसके प्रोसेसिंग का कार्य तत्काल शुरू किया जाए। इसके लिए बेहतर कार्य करने वाली निजी संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित करने की बात कही गई है, जो पहले से ही असम, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में इस क्षेत्र में सफलतापूर्वक काम कर रही हैं। यदि देहरादून में यह प्रयोग सफल रहता है, तो सरकार इसे चरणबद्ध तरीके से राज्य के अन्य सभी जिलों में भी विस्तार देगी ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।

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किसानों को बाजार उपलब्ध कराने पर जोर

योजना को धरातल पर उतारने के लिए अधिकारियों को किसानों हेतु नई तकनीकों, उचित प्रशिक्षण और बेहतर बाजार व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही, देहरादून के सौगंध पौधा केंद्र में 11 और 12 जून को आयोजित होने वाली दालचीनी की खेती और पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नोलॉजी पर आधारित अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला की तैयारियां भी समय पर पूरी करने को कहा गया है। बैठक में बागवानी मिशन और औद्यानिकी बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ निजी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे, जिन्होंने मोरिंगा के माध्यम से किसानों की आय में होने वाली उल्लेखनीय वृद्धि पर चर्चा की