देहरादून। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण राजधानी देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में अनियोजित व अवैध ढंग से बस रही नई कॉलोनियों पर पूरी तरह नकेल कसने की तैयारी में है। एमडीडीए ‘महायोजना-2041’ के तहत नई आवासीय कॉलोनियों के विकास के नियमों में कड़े बदलाव करने जा रहा है। जनसुनवाई के दौरान आम जनता से मिले सुझावों के आधार पर यह फैसला लिया गया है ताकि भविष्य में मूलभूत सुविधाओं के बिना कोई भी नई कॉलोनी न बस सके।
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने बताया कि महायोजना-2041 अगले 15 वर्षों के लिए देहरादून के नियोजित विकास की रूपरेखा तय करेगी। इस मास्टर प्लान में केवल भवन निर्माण ही नहीं, बल्कि यातायात प्रबंधन, जल निकासी, पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक सुविधाओं को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा।
फिलहाल रायपुर, पछुआदून और परवादून इलाकों में बड़े पैमाने पर आवासीय कॉलोनियां बस रही हैं। जनसुनवाई में लोगों ने शिकायत की कि बिल्डर शुरुआत में पार्क, ओपन जिम और ग्रीन एरिया का वादा करते हैं, लेकिन बाद में उस जमीन को बेच देते हैं। इसका खामियाजा कॉलोनीवासियों को भुगतना पड़ता है। एमडीडीए अब ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई के नियम बना रहा है।
जनसुनवाई के दौरान शहर में जल निकासी और ड्रेनेज प्लान का मुद्दा प्रमुखता से उठा। स्थानीय निवासियों ने बताया कि कॉलोनियों में लोग नालियों के ऊपर अवैध रैंप बना रहे हैं, जिससे पानी का बहाव रुकता है। नागरिकों ने मांग की है कि अनियोजित रैंप निर्माण पर रोक लगाई जाए और हर नई सड़क के साथ पक्की नाली का निर्माण अनिवार्य किया जाए।
इसके अलावा, राजपुर रोड क्षेत्र के एक वरिष्ठ नागरिक ने मुख्य मार्ग पर स्थित अपने आवासीय भवन का भू-उपयोग कमर्शियल कराने की मांग उठाई, क्योंकि आसपास कई शॉपिंग मॉल और व्यावसायिक संस्थान बन चुके हैं। प्राधिकरण ऐसे तकनीकी सुझावों का भी परीक्षण कर रहा है।
एमडीडीए को महायोजना-2041 पर अब तक 400 से अधिक आपत्तियां और सुझाव मिल चुके हैं। विभिन्न क्षेत्रों में आपत्तियों के निस्तारण के लिए जनसुनवाई की प्रक्रिया 21 जुलाई तक जारी रहेगी। इसके बाद विशेषज्ञों की टीम सभी सुझावों का तकनीकी व कानूनी परीक्षण कर मास्टर प्लान को अंतिम रूप देगी।

