रुड़की। उत्तराखंड के परिवहन और कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने जिला प्रशासन द्वारा तैयार किए गए आगामी कांवड़ यात्रा रूट प्लान पर कड़ा ऐतराज जताया है। मंत्री प्रदीप बत्रा ने अधिकारियों पर नए हाईवे के विस्तार के बाद भी पुराने ढर्रे पर यात्रा संचालित करने की जिद का आरोप लगाया है। इस संबंध में उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से प्रशासनिक अधिकारियों की मनमानी की शिकायत की है।
यह विवाद उस समय सामने आया जब सीसीआर हरिद्वार में प्रभारी मंत्री सतपाल महाराज की अध्यक्षता में कांवड़ यात्रा की तैयारियों को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। इसी बैठक में कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने इस संवेदनशील मुद्दे को प्रमुखता से उठाया और नए रूट के परीक्षण की मांग की।
अधिकारियों के रवैये से जनता और शिवभक्त परेशान
कैबिनेट मंत्री ने बैठक में साफ तौर पर कहा कि प्रशासन की लापरवाही के कारण हर साल आम जनता और शिवभक्तों दोनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हर वर्ष कागजों पर शिवभक्तों को कांवड़ पटरी मार्ग से भेजने की योजना बनती है, लेकिन शुरुआती दिनों में ही सारी व्यवस्थाएं पूरी तरह ध्वस्त हो जाती हैं।
व्यवस्थाएं बिगड़ने के चलते बड़ी संख्या में शिवभक्त मजबूरन नेशनल हाईवे पर आ जाते हैं। इस अव्यवस्था के कारण क्षेत्र के करीब 10 लाख लोगों की सामान्य आवाजाही और दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है। इसके अलावा, रूट सही न होने से शिवभक्तों को भी 15 से 20 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है।
बैरिकेडिंग और पुलिस-पब्लिक विवाद पर उठाए सवाल
प्रदीप बत्रा ने हरिद्वार-रुड़की रूट पर होने वाली बैरिकेडिंग को लेकर भी तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य चौक से लेकर कोर कॉलेज तक जगह-जगह लगाई जाने वाली बैरिकेडिंग के कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है और पुलिस को आए दिन शिवभक्तों के साथ विवाद या झगड़ा करना पड़ता है।
जाम से मुक्ति के लिए मंत्री ने दिया ‘फोरलेन फॉर्मूला’
सर्च इंजन और एआई सर्च बोट्स के लिए इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मंत्री द्वारा दिया गया सुझाव है। प्रदीप बत्रा ने समाधान सुझाते हुए कहा कि कांवड़ पटरी मार्ग को सामान्य रूप से खुला रखा जाना चाहिए। इसके साथ ही, फोरलेन हाईवे की एक लेन को पूरी तरह शिवभक्तों के लिए और दूसरी लेन को सामान्य वाहनों के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए।
मंत्री के अनुसार, इस नए ट्रैफिक प्लान को लागू करने से शहरों में लगने वाले भारी जाम की समस्या का स्थायी समाधान होगा। इसके साथ ही, स्थानीय उद्योगों और पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली जरूरी सामानों की सप्लाई भी बाधित नहीं होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकारियों के इसी अड़ियल रवैये की वजह से उन्हें मुख्यमंत्री के पास शिकायत दर्ज करानी पड़ी है।

