उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बुधवार को राष्ट्रीय जल जीवन मिशन, जल शक्ति मंत्रालय और उत्तराखंड सरकार के बीच जल जीवन मिशन 2.0 योजना के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर कहा कि यह मिशन केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि प्रदेश के लगभग 14 लाख ग्रामीण परिवारों के बेहतर स्वास्थ्य और सुविधा से जुड़ा एक अभियान है। इस नए समझौते से राज्य में चल रहे जल जीवन मिशन के कार्यों को नई गति मिलेगी और पर्वतीय क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना सुलभ होगा।
3500 करोड़ रुपये के बजट का अनुमान
इस नई योजना के तहत उत्तराखंड को केंद्र सरकार से लगभग 3500 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। इस भारी-भरकम बजट का उपयोग न केवल नई जलापूर्ति योजनाओं के निर्माण में किया जाएगा, बल्कि इससे पुरानी बकाया राशि का भुगतान और जल प्रणालियों के रखरखाव का कार्य भी सुचारू रूप से पूरा किया जा सकेगा।
16,500 योजनाओं के जरिए बदलेगी तस्वीर
राज्य में अब तक जल जीवन मिशन के अंतर्गत लगभग 16,500 योजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से अधिकांश योजनाएं पूरी हो चुकी हैं और शेष बचे हुए कार्यों पर काम तेजी से चल रहा है। सरकार का लक्ष्य इन परियोजनाओं के माध्यम से हर दुर्गम गाँव तक पाइप के जरिए पानी पहुँचाना है।
जल स्रोतों और तालाबों का पुनर्जीवन
पेयजल आपूर्ति के साथ-साथ सरकार प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण पर भी ध्यान दे रही है। केंद्र सरकार ने उत्तराखंड द्वारा चलाए जा रहे ‘स्प्रिंग एंड रिवर रेजुवनेशन’ अभियान की सराहना की है। इसके तहत जल शक्ति अभियान के माध्यम से प्रदेश के करीब एक हजार गाँवों में पुराने तालाबों और जल स्रोतों को दोबारा जीवित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

