विमान ईंधन की कीमतों में भारी उछाल: घरेलू एयरलाइंस ने दी उड़ानें बंद करने की चेतावनी

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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण विमान ईंधन की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है, जिससे भारतीय विमानन उद्योग गहरे संकट में घिर गया है। एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी प्रमुख एयरलाइंस ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर आगाह किया है कि यदि ईंधन की कीमतों में तुरंत राहत नहीं दी गई, तो वे परिचालन बंद करने पर मजबूर हो सकते हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस के अनुसार, परिचालन लागत इतनी अधिक हो गई है कि अब उड़ानों को जारी रखना आर्थिक रूप से संभव नहीं रह गया है।

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ईंधन की कीमतों में भारी असमानता

एयरलाइंस ने सरकार को लिखे पत्र में बताया है कि अप्रैल 2026 में घरेलू एटीएफ की कीमतों में केवल 15 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई, जबकि अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन्स के लिए यह वृद्धि 73 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 72 डॉलर से बढ़कर 118 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं, जिससे एयरलाइंस का पूरा नेटवर्क घाटे में चला गया है। विमान उड़ाने की कुल लागत में ईंधन का हिस्सा 30-40% से बढ़कर अब 55-60% तक पहुंच गया है।

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फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस की प्रमुख मांगें

एयरलाइंस ने संकट से उबरने के लिए सरकार के सामने तीन मुख्य मांगें रखी हैं:

  • प्राइसिंग सिस्टम: घरेलू और अंतरराष्ट्रीय परिचालन के लिए एक समान ‘फ्यूल प्राइसिंग सिस्टम’ लागू किया जाए।
  • टैक्स में कटौती: एटीएफ पर लगने वाले 11% उत्पाद शुल्क को अस्थायी रूप से निलंबित किया जाए।
  • वैट का सरलीकरण: दिल्ली और तमिलनाडु जैसे राज्यों में ईंधन पर 25% से 29% तक वैट लगता है, जिसे कम करने की अपील की गई है।

वैश्विक संकट और उड़ानों पर असर

पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण न केवल भारतीय बल्कि दुनिया भर की विमानन कंपनियां संकट में हैं। मार्च-अप्रैल 2026 में इस क्षेत्र से जुड़ी 60,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। एयर इंडिया ने अकेले एक महीने में हजारों उड़ानें रद्द की हैं, वहीं एमिरेट्स, कतर एयरवेज और लुफ्थांसा जैसी वैश्विक कंपनियों ने भी अपनी 40% से 62% तक उड़ानें बंद कर दी हैं। यदि सरकार ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो घरेलू यात्रियों के लिए हवाई सफर बहुत महंगा या दुर्लभ हो सकता है।