उत्तराखंड ITI अनुदेशक भर्ती पर हाईकोर्ट की मुहर: CITS अनिवार्य, 370 पद भरेंगे

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उत्तराखंड के सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) में 370 अनुदेशकों की भर्ती को लेकर चल रहा विवाद अब समाप्त हो गया है। नैनीताल हाईकोर्ट ने इस भर्ती प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार करते हुए इससे जुड़ी सभी रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति रवींद्र मैठानी की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि इस भर्ती के लिए राष्ट्रीय शिल्प अनुदेशक प्रमाण-पत्र (NCIC/CITS) एक अनिवार्य योग्यता बनी रहेगी। कोर्ट के इस फैसले से अब राज्य में अटकी हुई भर्ती प्रक्रिया को गति मिलेगी और रिक्त पदों को भरने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

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CITS प्रमाण-पत्र की अनिवार्यता पर कोर्ट का रुख

कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि यह भर्ती ‘उत्तराखंड राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान-अनुदेशक नियमावली 2003’ के अनुसार हो रही है, जिसमें साल 2022 में संशोधन कर CITS प्रमाण-पत्र को अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता घोषित किया गया था। हालांकि याचिकार्ताओं ने केंद्र सरकार के एक पुराने ज्ञापन का हवाला देकर योग्यता में ढील देने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक राज्य सरकार अपनी नियमावली में औपचारिक संशोधन नहीं करती, तब तक केंद्र के निर्देश स्वतः लागू नहीं माने जा सकते।

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भर्ती के नियमों में बदलाव संभव नहीं

सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि भर्ती का विज्ञापन 16 फरवरी 2024 को जारी किया गया था। कोर्ट ने कानूनी उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि एक बार विज्ञापन जारी होने के बाद चयन के मानदंडों या योग्यता में बदलाव करना उचित नहीं है। विज्ञापन के समय जो सेवा नियम प्रभावी थे, उन्हीं के आधार पर चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना अनिवार्य है। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने भी कोर्ट में स्पष्ट किया कि वे सेवा नियमों के विरुद्ध कोई भी कदम नहीं उठा सकते।

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चयन सूची में नाम होने का मतलब नियुक्ति नहीं

हाईकोर्ट ने उन उम्मीदवारों के हस्तक्षेप आवेदनों को भी खारिज कर दिया जो अंतिम मेरिट सूची में शामिल थे। कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल चयन सूची में नाम आ जाने से किसी भी उम्मीदवार को नियुक्ति पाने का कोई अटूट या कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता। सरकार और आयोग को वर्तमान नियमों के तहत ही प्रक्रिया को बिना किसी ढील के पूरा करने का निर्देश दिया गया है।

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