उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्य सरकार द्वारा छोटे ठेकेदारों के हित में लिए गए हालिया फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार के इस कदम की सराहना तो की, लेकिन इसे अधूरा बताते हुए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव और मांगें भी सामने रखी हैं। रावत का मानना है कि राज्य के स्थानीय ठेकेदारों और मध्यम वर्ग को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सरकार को और अधिक ठोस और साहसी कदम उठाने की आवश्यकता है।
‘डी’ श्रेणी के ठेकेदारों के लिए कार्य सीमा बढ़ाने की मांग
हरीश रावत के अनुसार, ‘डी’ श्रेणी के ठेकेदारों के लिए वर्तमान में निर्धारित डेढ़ करोड़ रुपये तक के काम की सीमा पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सरकार को सुझाव दिया है कि इस सीमा को बढ़ाकर चार करोड़ रुपये किया जाना चाहिए ताकि छोटे ठेकेदारों को बड़े स्तर पर काम मिल सके और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो।
स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता और सरकारी टेंडर
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी मांग उठाई है कि 25 करोड़ रुपये तक के सरकारी टेंडरों के लिए केवल उत्तराखंड के स्थायी निवासी ठेकेदारों को ही पात्र माना जाना चाहिए। उनका तर्क है कि इससे राज्य का अपना एक मजबूत मध्यम वर्ग खड़ा होगा और निर्माण कार्यों से होने वाला आर्थिक लाभ राज्य के भीतर ही रहेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदेश को बाहरी ठेकेदारों के लिए ‘स्वर्ग’ नहीं बनने देना चाहिए, बल्कि स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा करनी चाहिए।
बहरहाल, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 1.5 करोड़ तक के ठेके ‘डी’ श्रेणी के ठेकेदारों के लिए खोले है, लेकिन हरीश रावत के बयान के बाद जनता के बीच यह चर्चा है कि जब हरीश रावत स्वयं मुख्यमंत्री थे तो उनके कार्यकाल के दौरान इस मुद्दे पर पहल क्यों नहीं की गई?

