देहरादून। दून प्रेस क्लब में आयोजित कांग्रेस के सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम में वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने अपने राजनीतिक और व्यक्तिगत संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा कि यदि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चाय बेची है, तो उन्होंने भी छात्र जीवन में तंगी के दौर से गुजरते हुए हरिद्वार बस अड्डे पर चाट बेची है। डॉ. रावत के इस बयान से प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं गर्मा गई हैं
हरक सिंह रावत ने प्रेस क्लब में कार्यकर्ताओं और मीडिया के सामने अपनी जिंदगी के शुरुआती संघर्षों की परतें खोलीं। उन्होंने भावुक होकर बताया कि छात्र जीवन में उनके पास पैसों का भारी अभाव था। जरूरतें पूरी न होने पर एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें मजबूरी में एक दुकानदार के पास अपनी हाथ की घड़ी गिरवी रखनी पड़ी थी।
अपने स्कूली दिनों का किस्सा सुनाते हुए पूर्व मंत्री ने कहा कि जब वे श्रीनगर में 11वीं कक्षा की पढ़ाई कर रहे थे, तब तक उन्होंने जीवन में कभी ट्रेन नहीं देखी थी। एक दिन वे बिना घरवालों को बताए चुपचाप कोटद्वार पहुँच गए। कोटद्वार पहुँचने पर ही उन्होंने अपने जीवन में पहली बार ट्रेन और ब्लैक एंड व्हाइट टीवी देखा था।
ट्रेन देखने के उत्साह में वे बिना यह जाने उसमें सवार हो गए कि गाड़ी कहाँ जा रही है। सफर करते-करते वे लक्सर रेलवे स्टेशन जा पहुँचे। जेब में पैसे न होने के कारण उन्हें पेट भरने के लिए लक्सर स्टेशन के पास ही एक साइकिल स्टैंड पर काम करना पड़ा। इस दौरान एक दिन दुकान मालिक ने बर्तन धोने को लेकर उन्हें बहुत बुरी तरह डांट दिया, जिससे उनके आंसू निकल गए।
दुकान पर बैठकर चाय पी रहे एक रोडवेज कंडक्टर ने जब रोते हुए बच्चे को देखा तो वे उन्हें अपने साथ हरिद्वार ले आए। जीवन यापन के लिए डॉ. हरक सिंह रावत ने तीन दिनों तक हरिद्वार बस अड्डे पर चाट बेची। डॉ. रावत ने कहा कि इसी कठोर संघर्ष ने उन्हें आम जनता के दुख-दर्द को समझने की ताकत दी है और वे मेहनत के हर पड़ाव से गुजरकर आज इस मुकाम तक पहुँचे हैं।

