Dehradun: फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रमाण पत्र मामले में SIT गठित, 4 छात्राओं के MBBS दाखिले निरस्त

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देहरादून। राजधानी देहरादून में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाने के लिए फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की शिकायतें सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया है। अलग-अलग थाना क्षेत्रों में एफआईआर दर्ज होने के बाद देहरादून पुलिस ने पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच टीम गठित करने की तैयारी पूरी कर ली है।

जांच की शुरुआत स्वतंत्रता सेनानी कल्याण समिति के आरोपों के बाद हुई थी। जिला प्रशासन द्वारा कराई गई जांच में चार युवतियों के प्रमाण पत्रों के लिए लगाए गए दस्तावेज कूट रचित पाए गए। इसके बाद जिला प्रशासन की शिकायत पर पुलिस ने चार छात्राओं समेत पांच आरोपियों के खिलाफ दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कीं।

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मामले की गंभीरता को देखते हुए एचएनबी मेडिकल विश्वविद्यालय ने कड़ा एक्शन लिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपी चारों छात्राओं के एमबीबीएस दाखिले तत्काल प्रभाव से निरस्त करते हुए उनकी सीटों को रिक्त घोषित कर दिया है।

फर्जीवाड़े की पहली प्राथमिकी क्लेमेंटटाउन थाने में ग्राम विकास अधिकारी डिम्पल की शिकायत पर दर्ज हुई। इसमें तृप्ति और उमा देवी के खिलाफ जाली दस्तावेजों के प्रयोग का आरोप है। वहीं, दूसरा मामला रायपुर थाने में दर्ज हुआ, जहां ‘अपनी सरकार’ पोर्टल पर खुशी, परी और स्वाति के नाम से जमा ऑनलाइन आवेदनों के पते कूट रचित पाए गए।

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एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने बताया कि शिकायतकर्ता जगदीश कुमार की तहरीर और क्लेमेंटटाउन के मामलों को मिलाकर पुलिस जांच आगे बढ़ा रही है। फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने वाले गिरोह की कड़ियों को जोड़ने के लिए एसआईटी का गठन किया जा रहा है, जो आवेदन प्रक्रिया और संलग्न दस्तावेजों की पूरी पड़ताल करेगी।

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स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटा फर्जीवाड़े के तार सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय गिरोहों से जुड़े होने की आशंका है। वर्ष 2026 में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में 8 पुलिस सिपाहियों की भर्ती फर्जी सेनानी प्रमाण पत्र से होने पर उनके खिलाफ रिकवरी व कानूनी कार्रवाई की गई थी। इसके अलावा यूपी के बलिया, मेरठ, भदोही और चंदौली में नीट के कम अंकों वाले 64 से अधिक अभ्यर्थियों के फर्जी प्रमाण पत्र पर हुए एमबीबीएस दाखिले निरस्त किए जा चुके हैं।