उत्तराखंड के चिकित्सा शिक्षा विभाग में एक सनसनीखेज धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जहां एक जाली शासनादेश के आधार पर प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों को उपनल कर्मचारियों के लिए ‘समान कार्य समान वेतन’ लागू करने का फर्जी आदेश भेज दिया गया।
हैरान करने वाली बात यह है कि यह फर्जी आदेश ‘दीपेश कुमार सिंह’ नाम के एक ऐसे सचिव के हस्ताक्षर से जारी हुआ, जो शासन में इस पद पर तैनात ही नहीं हैं। जब दून और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज ने इस आदेश के प्रारूप पर संदेह जताया, तब जाकर चिकित्सा शिक्षा निदेशालय स्तर पर इसकी प्राथमिक जांच की गई और पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ।
चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. अजय आर्य ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत इस आदेश पर रोक लगा दी है और सोमवार से इसकी विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं; जरूरत पड़ने पर पुलिस में FIR भी दर्ज कराई जाएगी। समय रहते इस धोखाधड़ी को पकड़ लिया गया, अन्यथा बजट जारी होकर वेतन निकल जाने पर भारी वित्तीय अनियमितता हो सकती थी।
हालांकि, इस प्रशासनिक गड़बड़ी और असमंजस के बीच दून मेडिकल कॉलेज सहित विभिन्न कॉलेजों के सैकड़ों उपनल कर्मचारी पिछले ढाई महीने से वेतन न मिलने के कारण गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। उपनल महासंघ के जिलाध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कर्मचारियों की इस बदहाली पर चिंता जताई है।
वहीं कॉलेज प्रशासन का कहना है कि वे अनुबंध की प्रक्रिया पूरी कर अब शासन के वास्तविक और सही आदेश का इंतजार कर रहे हैं ताकि कर्मचारियों को तत्काल उनका उचित वेतन दिया जा सके।

