Uttarakhand: उपभोक्ता को थमाए 6 गलत बिल तो अफसरों की जेब से की वसूली

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देहरादून। उत्तराखंड विद्युत लोकपाल डीपी गैरोला ने ऊर्जा निगम की लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए दो मामलों में ऐतिहासिक फैसले सुनाए हैं। लोकपाल ने खराब मीटर के बावजूद उपभोक्ता को लगातार 6 बिल थमाने पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन से वसूली के कड़े निर्देश दिए हैं। वहीं एक अन्य फैसले में हरिद्वार के एक उपभोक्ता पर ठोकी गई ₹11,01,641 की भारी-भरकम पेनल्टी को पूरी तरह निरस्त कर दिया है।

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पहला मामला देहरादून के लखी चौक का है, जहाँ अधिवक्ता हरविंदर सिंह सहगल का बिजली मीटर खराब होने के बावजूद ऊर्जा निगम ने नियमानुसार 45 दिन में बदलने के बजाय लगातार छः बिलिंग चक्रों तक आईडीएफ बिल भेजे। विद्युत लोकपाल ने यूईआरसी नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि दो बार से अधिक आईडीएफ बिल नहीं भेजे जा सकते। लोकपाल ने उपभोक्ता से केवल दो बिलों की राशि लेने और बाकी चार बिलों का खर्च दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के वेतन से वसूलने का आदेश दिया।

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दूसरा मामला हरिद्वार के ज्वालापुर स्थित जय अम्बे आइस मॉल्स से जुड़ा है। मालकिन राजीव रानी ने जनवरी 2024 में लोड बढ़ाने का आवेदन किया था, लेकिन ऊर्जा निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की और उल्टा बाद में ₹11,01,641 का असेसमेंट बिल थमा दिया। उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच के आदेश को पलटते हुए लोकपाल ने इस ₹11 लाख से अधिक की पूरी पेनल्टी को रद्द कर दिया।

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इसके साथ ही लोकपाल ने आदेश दिया कि आवेदन के बाद उपभोक्ता से वसूला गया अतिरिक्त जुर्माना आगामी बिजली बिलों में समायोजित किया जाए। साथ ही ऊर्जा निगम को तय समय सीमा के भीतर उपभोक्ता का लोड बढ़ाने की प्रक्रिया पूरी करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

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