Dehradun: सरकारी अस्पताल की ‘कड़वी जुबान’ वायरल, Social Media पर फूटा लोगों का गुस्सा…

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देहरादून। उत्तराखंड के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शुमार दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल एक बार फिर चर्चा में है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार वजह अस्पताल की कोई चिकित्सा उपलब्धि नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक रील बनी है।

वायरल वीडियो में अस्पताल से जुड़ी बताई जा रही एक स्वास्थ्यकर्मी की कथित भाषा और व्यवहार को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही रील में दिखाई दे रही स्वास्थ्यकर्मी दून अस्पताल की बताई जा रही है।

हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही अस्पताल प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने आया है। लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने जमकर अपनी नाराजगी व्यक्त की है। कमेंट बॉक्स में कई लोगों ने लिखा कि अस्पताल में आने वाला हर व्यक्ति पहले से ही शारीरिक और मानसिक परेशानी से गुजर रहा होता है।

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ऐसे में स्वास्थ्यकर्मियों की भाषा और व्यवहार संवेदनशील तथा सम्मानजनक होना चाहिए। कुछ यूजर्स ने लिखा, “ये जानवर नहीं, मरीज हैं।” वहीं कई लोगों ने सलाह दी कि एक डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी की पहचान केवल उसके इलाज से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार से भी होती है।

दून अस्पताल पहले सफाई व्यवस्था, मरीजों की लंबी कतार, अव्यवस्थित सिस्टम, कर्मचारियों के व्यवहार और सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों को लेकर चर्चा में रहा है। ऐसे में इस तरह की वायरल सामग्री ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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जानकारों का मानना है कि चिकित्सा सेवा केवल दवाइयों तक सीमित नहीं होती, बल्कि मरीज के साथ सहानुभूतिपूर्ण संवाद भी इलाज का अहम हिस्सा है। कई बार स्वास्थ्यकर्मी का एक सकारात्मक व्यवहार मरीज के मनोबल को बढ़ा देता है, जबकि कठोर भाषा उसका विश्वास कमजोर कर सकती है।

यदि वायरल वीडियो वास्तविक परिस्थितियों को दर्शाता है, तो यह अस्पताल प्रशासन के लिए आत्ममंथन का विषय हो सकता है। वहीं यदि वीडियो संदर्भ से हटकर प्रस्तुत किया गया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच भी उतनी ही जरूरी है सरकारी अस्पताल समाज के आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों की सबसे बड़ी उम्मीद होते हैं।

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ऐसे में वहां की कार्यसंस्कृति, संवाद शैली और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता पर विशेष ध्यान देना समय की मांग है। यदि मरीजों का भरोसा सरकारी अस्पतालों से उठने लगेगा, तो वे मजबूरी में झोलाछाप या अप्रमाणित उपचार की ओर रुख कर सकते हैं, जिसका असर स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी पड़ेगा।

अब सभी की निगाहें दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रशासन पर हैं कि वह इस वायरल प्रकरण पर क्या रुख अपनाता है और यदि आवश्यक हो तो क्या कार्रवाई या स्पष्टीकरण सामने आता है।