पहले हर छोटे काम के लिए शासन स्तर पर मंजूरी लेनी पड़ती थी, लंबी प्रक्रिया से विकास की रफ्तार थी धीमी। सचिव शैलेश बगौली बोले- स्थायी और अस्थायी दोनों कामों पर लागू होगा नियम, 5 करोड़ से ऊपर के काम पर पहले की तरह शासन की मंजूरी जरूरी।
देहरादून। आगामी कुंभ मेले के लिए धामी सरकार ने अपनी कमर कस ली है। कहीं कोई कोर कसर बाकी न रह जाए इसकी तैयारियों को रफ्तार देने के लिए धामी कैबिनेट ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। अब कुंभ मेलाधिकारी को एक करोड़ रुपये तक के विकास कार्यों को स्वीकृत करने का अधिकार मिल गया है।
सचिवालय में कैबिनेट फैसलों की जानकारी देते हुए सचिव-गोपन शैलेश बगौली ने बताया कि अभी तक कुंभ से जुड़े सभी कामों की मंजूरी के लिए शासन स्तर पर प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी। लंबी और जटिल प्रक्रिया की वजह से कुंभ मेले के निर्माण कामों की रफ्तार धीमी पड़ जाती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
धामी कैबिनेट के नए फैसले से हरिद्वार में चल रहे अर्धकुंभ मेले की तैयारियों को रफ्तार मिलेगी। अब एक करोड़ तक के काम: कुंभ मेलाधिकारी खुद स्वीकृत करेंगे। जबकि उससे अधिक के निर्माण कार्यों के लिए गढ़वाल मंडल आयुक्त मंजूरी देंगे। गढ़वाल कमिश्नर 5 करोड़ तक के काम को अपने स्तर पर मंजूरी दे सकते हैं। वहीं पांच करोड़ से ज्यादा के निर्माण कार्यों के लिए पहले की तरह ही शासन स्तर से मंजूरी लेनी पड़ेगी।
सचिव बगौली ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था स्थायी और अस्थायी दोनों प्रकार के कामों पर लागू होगी। चाहे स्थायी घाट निर्माण हो या अस्थायी टेंट-सड़क, मेलाधिकारी मौके पर ही फैसला ले सकेंगे ताकि काम गुणवत्ता के साथ समय पर पूरे हो सकें।
क्यों जरूरी था ये फैसला?
दरअसल 2027 में हरिद्वार मे होने वाला अर्ध कुंभ मेले की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। आस्था के इस महापर्व पर करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, सड़क, पेयजल, शौचालय, पार्किंग जैसे हजारों छोटे-बड़े काम होने हैं। धामी कैबिनेट के इस फैसले से पहले हर फाइल सिस्टम की टेबल पर तीन-तीन चार-चार महीने सरकती रहती थी। जिसके चलते निर्माण कार्यों में देरी हो जाती थी।
त्यौहार के दिन आधी-अधूरी तैयारियों का ठीकरा शासन -प्रशासन के सिर फूटता था और सरकार के हाथ बदनामी लगती थी लेकिन अब ग्राउंड लेवल पर फौरन फैसला होगा। चट्ट मंगनी पट्ट ब्याह की तर्ज पर निर्माण कार्य होंगे। बस जरूरत होगी पैनी निगाह की ताकि ठेकेदार मनमर्जी का रायता न फैलाने की हिमाकत न कर सकें।

