पुरोला में सोमवार को रंवाई घाटी को एक अलग जिला बनाने की दशकों पुरानी मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। इस ऐतिहासिक मांग के समर्थन में विभिन्न न्याय पंचायतों से आए जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने एक विशाल महारैली निकाली, जो खेल मैदान से शुरू होकर मुख्य बाजार और कुमोला रोड होते हुए तहसील परिसर तक पहुंची।
आंदोलनकारियों ने पूर्व में घोषित जनपद गठन के निर्णय को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने की पुरजोर वकालत की है। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी को सौंपा, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि रंवाई क्षेत्र लंबे समय से भौगोलिक विषमताओं और प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार रहा है, जिसका एकमात्र समाधान इसे जिला बनाना ही है।
दो दशकों का लंबे संघर्ष का ऐतिहासिक स्वरूप
रंवाई को अलग जिला बनाने की यह मांग कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले दो दशकों से निरंतर उठ रही है। ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाए तो रंवाई घाटी राजशाही के समय से ही रंवाई परगना के रूप में एक अलग पहचान रखती थी, लेकिन फरवरी 1960 में जब उत्तरकाशी जनपद की स्थापना हुई, तब गंगा और यमुना घाटी को एक साथ जोड़ दिया गया था। तभी से यमुना घाटी के निवासी प्रशासनिक सुगमता के लिए पृथक जनपद की मांग कर रहे हैं।
इस आंदोलन को सभी राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त है, जिसका प्रमाण पुरोला की रैली में भाजपा और कांग्रेस सहित कई संगठनों के कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी और पूर्व विधायकों की उपस्थिति में देखने को मिला, जो इस क्षेत्र के विकास और प्रशासनिक न्याय के लिए एकजुट दिखाई दिए।

