देहरादून। लगातार हो रही बारिश ने देहरादून की वायु गुणवत्ता को पूरी तरह बदल दिया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक बृहस्पतिवार को दून का एक्यूआई मात्र 18 पहुंच गया। इस बेहतर रेटिंग के साथ दून ने दिल्ली, मुंबई, चेन्नई समेत देश के कई प्रमुख शहरों को पीछे छोड़ दिया।
बारिश ने वातावरण में फैली धूल और प्रदूषक कणों को धोकर साफ कर दिया। CPCB के अनुसार दून की हवा इस समय देश के अधिकांश राजधानी शहरों से स्वच्छ है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बारिश ने PM-2.5 और PM-10 जैसे सूक्ष्म कणों को जमीन पर बिठा दिया।
इस साल निर्माण गतिविधियों और वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण दून की हवा कई बार खराब हुई थी। लेकिन पिछले कुछ दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने स्थिति पलट दी। शहरवासियों को साफ हवा मिलने से राहत महसूस हो रही है।
दून से बेहतर सिर्फ नाहारलागुन
CPCB आंकड़ों के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश के नाहारलागुन का एक्यूआई 15 रहा जबकि इटानगर का 21 दर्ज किया गया। दून का 18 का स्कोर इन दोनों से बेहतर रहा। अन्य प्रमुख शहरों की स्थिति इस प्रकार रही: मुंबई 73, दिल्ली 48, कोलकाता 63, चेन्नई 76, बेंगलुरु 59, हैदराबाद 44, जयपुर 62, लखनऊ 46, शिमला 30, पटना 61, भोपाल 78, गुवाहाटी 96 और गांधीनगर 74।
दून की पुरानी पहचान स्वच्छ वातावरण की रही है। लगातार बारिश ने उस पहचान को एक बार फिर ताजा कर दिया। पहाड़ी इलाके में प्राकृतिक हरियाली और बारिश का संयोजन वायु गुणवत्ता सुधारने में कारगर साबित हुआ। मौसम विभाग के अनुसार बारिश के दौरान हवा में मौजूद सस्पेंडेड पार्टिकल्स धुल जाते हैं। इससे एक्यूआई तेजी से सुधरता है। दून में यही प्रक्रिया देखने को मिली।
शहर के पार्कों और खुले इलाकों में सुबह-शाम लोगों की आवाजाही बढ़ गई है। खासकर सांस की बीमारियों से जूझ रहे लोगों और बच्चों को इस स्वच्छ हवा से फायदा हो रहा है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश के अलावा लंबे समय तक स्वच्छ हवा बनाए रखने के लिए निर्माण धूल पर नियंत्रण, वाहन उत्सर्जन जांच और हरित क्षेत्र बढ़ाने की जरूरत है। CPCB नियमित रूप से देशभर के शहरों का एक्यूआई मॉनिटर करता है। दून की बेहतर स्थिति उत्तराखंड के लिए सकारात्मक खबर है और अन्य शहरों के लिए उदाहरण भी।
प्रशासन को इस मौके का फायदा उठाते हुए प्रदूषण नियंत्रण के स्थायी उपाय करने चाहिए। ताकि बारिश रुकने के बाद भी हवा साफ बनी रहे। दून की इस उपलब्धि ने एक बार फिर साबित कर दिया कि प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग वायु प्रदूषण से लड़ने में कितना प्रभावी हो सकता है।

