उत्तराखंड में स्कूलों के नए समय पर गहराया विवाद;  शिक्षकों ने सौंपा लिखित प्रस्ताव

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देहरादून में स्कूलों की नई समय सारिणी को लेकर शिक्षा विभाग और शिक्षक संगठनों के बीच का टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। शासन की पहल पर शिक्षा महानिदेशालय में बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठक बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई। जहाँ एक ओर अधिकारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति का हवाला देते हुए स्कूल का समय बढ़ाने पर अड़े रहे, वहीं शिक्षक संगठनों ने बच्चों के स्वास्थ्य का हवाला देते हुए इसका कड़ा विरोध किया। दोनों पक्षों के बीच गतिरोध जारी है और फिलहाल समय सारिणी पर कोई सहमति नहीं बन पाई है।

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समय बढ़ाने के पक्ष में अधिकारियों के तर्क

बैठक के दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या का हवाला दिया। उनका तर्क है कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और पाठ्यक्रम को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए विद्यालय संचालन का समय बढ़ाया जाना अनिवार्य है। इस बैठक में अपर शिक्षा निदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे जिन्होंने इस नीति की वकालत की।

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शिक्षक संगठनों का विरोध और बच्चों का स्वास्थ्य

शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर समय बढ़ाने के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि चिलचिलाती धूप और बढ़ती गर्मी में बच्चों को ज्यादा देर तक स्कूल में रखना उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होगा। संगठनों का मानना है कि नई शिक्षा नीति में गुणवत्ता सुधार के कई अन्य प्रावधान हैं, लेकिन विभाग सारा जोर सिर्फ समय बढ़ाने पर दे रहा है, जो उचित नहीं है।

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लिखित प्रस्ताव और प्रमुख मांगें

अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से रखने के लिए शिक्षक संगठनों ने शासन को एक लिखित प्रस्ताव भी सौंपा है। इसमें प्राथमिक शिक्षक संघ के मनोज तिवारी, दिग्विजय सिंह नेगी और जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनोद थापा जैसे दिग्गज नेताओं ने अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराई हैं। शिक्षकों का स्पष्ट कहना है कि वे किसी भी कीमत पर बच्चों की सेहत से समझौता स्वीकार नहीं करेंगे।

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