गैरसैंण विधानसभा सत्र: पूर्व CM भुवन चन्द्र खण्डूड़ी को CM धामी ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि, बोले- ‘एक युग का अंत हो गया’

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चमोली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी (सेनि) के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय खण्डूड़ी जी एक अनुशासित सैनिक, समर्पित जनसेवक और कुशल प्रशासक थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन देश और देवभूमि की सेवा में समर्पित कर दिया।

सदन में अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूड़ी भूषण का उल्लेख करते हुए अत्यंत भावुक क्षण साझा किए। उन्होंने कहा कि एक बेटी के लिए उसके पिता ही उसके पहले नायक होते हैं, लेकिन जनरल खण्डूड़ी जी केवल उत्तराखंड के ही नहीं, बल्कि पूरे देश के नायक रहे हैं। उन्होंने अपने जीवन में जिस भी पद और जिम्मेदारी को संभाला, उसे पूर्ण ईमानदारी, समर्पण और उच्च नैतिक मूल्यों के साथ निभाया।

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खण्डूड़ी जी के गौरवशाली सैन्य करियर का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 1971 के भारत-पाक युद्ध में उन्होंने अपने अदम्य साहस और रणनीतिक कौशल का परिचय दिया था। सेना की इंजीनियरिंग सेवाओं में रहते हुए देश के सीमांत क्षेत्रों में मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में उनका अतुलनीय योगदान रहा, जिसके लिए उन्हें ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ से सम्मानित किया गया था।

सैन्य सेवा से सेवानिवृत्ति के पश्चात उन्होंने वर्ष 1991 में गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित होकर जनसेवा की नई पारी शुरू की। पांच बार गढ़वाल का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने संसद में पृथक उत्तराखण्ड राज्य की मांग को पूरी मजबूती से उठाया। उनके ओजस्वी वक्तव्यों और स्पष्ट दृष्टिकोण ने राज्य आंदोलन को नई वैचारिक मजबूती प्रदान की थी।

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पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री के रूप में खण्डूड़ी जी ने ऐतिहासिक कार्य किए। देश में स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना और ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ को धरातल पर उतारने में उनकी मुख्य भूमिका रही, जिसका सीधा लाभ आज देश के करोड़ों लोगों को मिल रहा है।

उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री के रूप में वर्ष 2007 और 2011 में उन्होंने पारदर्शी, भ्रष्टाचार मुक्त और अनुशासित शासन की एक मजबूत मिसाल कायम की। प्रदेश में सख्त लोकायुक्त व्यवस्था की उनकी पहल भ्रष्टाचार के विरुद्ध उनके कड़े रुख को दर्शाती थी। उनकी कार्यशैली में सेना के अनुशासन और आम जनता के प्रति संवेदनशीलता का अनूठा संगम देखने को मिलता था।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि खण्डूड़ी जी का व्यक्तित्व उनके जैसे अनेक युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत रहा है और उन्हें सदैव खण्डूड़ी जी का स्नेह एवं मार्गदर्शन प्राप्त होता रहा। उन्होंने कहा कि 19 मई 2026 को 91 वर्ष की आयु में उनका निधन राष्ट्र और प्रदेश के सार्वजनिक जीवन के लिए एक अपूरणीय क्षति है और उनके जाने से वास्तव में एक युग का अंत हो गया है।