देहरादून। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने सोलर प्रोजेक्ट लगाने वाले विकासकों को बड़ा झटका देते हुए राहत देने से साफ मना कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस साल 31 मार्च के बाद चालू हुए सोलर प्रोजेक्ट्स को नियमानुसार और उपभोक्ता हित में 4.64 रुपये के बजाय 4.10 रुपये प्रति यूनिट की दर ही दी जाएगी। इस फैसले का सीधा असर मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत सौर ऊर्जा का काम कर रहे लोगों पर पड़ा है।
राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत स्वरोजगार का सपना देख रहे डेवलपर्स ने 31 मार्च 2026 की समयसीमा के बाद शुरू प्रोजेक्ट्स के लिए 4.64 रुपये प्रति यूनिट का पुराना टैरिफ बरकरार रखने की मांग की थी। नियामक आयोग ने इस मांग को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जब विकासकों ने अनुबंध की शर्तों को पढ़कर स्वेच्छा से हस्ताक्षर किए थे, तो अब वे पीछे नहीं हट सकते।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि प्रोजेक्ट में देरी उनकी नहीं बल्कि सरकारी विभागों की लापरवाही के कारण हुई है। उरेडा ने भी माना कि कई जिलों में ऐसी दिक्कतें थीं और बैंकों से कर्ज अटक रहे थे। हालांकि, आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा और सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने याचिका खारिज कर दी।
यह मामला पौड़ी गढ़वाल के ग्राम बहेड़ा (पट्टी पैनलस्यू) से जुड़ा है, जहां उपासना सक्सेना, कुलदीप सिंह और दिव्या खन्ना ने 200-200 किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट के लिए आवेदन किया था। नियमानुसार तकनीकी मंजूरी मिलने के 15 दिन के भीतर अवार्ड लेटर मिलना चाहिए था, लेकिन मार्च 2025 में मंजूरी मिलने के बाद भी फाइल महीनों तक यूपीसीएल और उरेडा के दफ्तरों में अटकी रही।
फाइल में महीनों की देरी के बाद जब एलओए जारी हुआ, तब प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए मात्र 38 दिन बचे थे। डेवलपर्स का तर्क था कि इतने कम समय में काम पूरा करना असंभव था, इसलिए उन्हें पुरानी दर का लाभ मिलना चाहिए। लेकिन आयोग ने साफ कर दिया कि अनुबंध की शर्तों पर हस्ताक्षर करने के बाद अब दरों में बदलाव संभव नहीं है और उपभोक्ताओं के हित सर्वोपरि हैं।

