उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज सोमवार को विधानसभा के विशेष सत्र में एक बार फिर अपने राजनीतिक कौशल और रणनीतिक संतुलन का उम्दा परिचय दिया। दरअसल, सदन में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के दौरान सत्ताधारी भाजपा सरकार ने न सिर्फ अपना पक्ष पूरी मजबूती से रखा, बल्कि विपक्ष को चौतरफा घेरने में भी सफलता हासिल की।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सदन में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर सरकार का स्पष्ट रुख पटल पर रखते हुए अधिनियम के प्रावधानों की विस्तारपूर्वक चर्चा की। इस दौरान मुख्यमंत्री धामी ने इस अधिनियम को महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक समावेशी बनाएगा।
वहीं इस दौरान मुख्यमंत्री धामी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और उसके सहयोदी दलों को महिला विरोधी बताते हुए विपक्ष पर कड़ा प्रहार किया। हालांकि, अहम बात यह भी रही कि विधानसभा में अधिनयम पर बहस के दौरान कांग्रेस इस बार वॉकआउट नहीं कर पाई और सरकार ने कांग्रेस विधायकों की मौजूदगी में ही उनके “नकारात्मक रुख” की कड़ी निंदा करते हुए निंदा प्रस्ताव पारित कराते हुए विपक्ष को असहज स्थिति में ला दिया।
सदन की कार्रवाई केवल पक्ष-विपक्ष की तीखी नोंक-झोंक तक सीमित नहीं रही, बल्कि इस बीच एक सकारात्मक पहल भी सामने आई। उत्तराखंड विधानसभा द्वारा केंद्र सरकार से संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण शीघ्र लागू करने का अनुरोध भी किया गया।
साथ ही अन्य प्रदेशों में कांग्रेस द्वारा वॉकआउट कर जो राजनीतिक संदेश देशभर में दिया गया, वहीं उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार की रणनीति में उलझ कर रह गई और निंदा प्रस्ताव पारित होने के दौरान कांग्रेस की मौजूदगी ने पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रूप से सरकार के पक्ष में मोड़ दिया।
बहरहाल, कुल मिलाकर इस विशेष सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपना आक्रामक और संतुलित राजनीति रवैया पेश करते हुए न केवल विपक्ष को घेरा, बल्कि महिलाओं के मुद्दे पर ठोस प्रस्ताव के जरिए राजनीतिक बढ़त भी हासिल की।

