देहरादून का क्लेमेनटाउन अब ‘शौर्य नगर’ के नाम से जाना जाएगा, कैंट बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पास

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देहरादून में अंग्रेजों के जमाने से बसे ऐतिहासिक क्लेमेनटाउन छावनी क्षेत्र का नाम बदलने की तैयारी पूरी हो गई है। छावनी परिषद की विशेष बोर्ड बैठक में सर्वसम्मति से इस क्षेत्र का नया नाम ‘शौर्य नगर’ रखने पर मुहर लगा दी गई है। सैन्य पृष्ठभूमि और क्षेत्र की गौरवशाली छावनी पहचान को सम्मान देने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। बोर्ड ने इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए मध्य कमान को भेज दिया है, जिसके बाद इसे केंद्र सरकार को प्रेषित किया जाएगा। केंद्र की हरी झंडी मिलते ही क्लेमेनटाउन आधिकारिक रूप से ‘शौर्य नगर’ कहलाएगा।

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नाम परिवर्तन की प्रक्रिया और विकल्प

छावनी परिषद की बैठक में नाम बदलने को लेकर तीन प्रमुख विकल्पों पर गहन चर्चा हुई, जिनमें ‘दून वैली’, ‘शिवालिक नगर’ और ‘शौर्य नगर’ शामिल थे। काफी विचार-विमर्श के बाद अधिकारियों ने सैन्य परंपरा को दर्शाने वाले ‘शौर्य नगर’ नाम को सबसे उपयुक्त माना। यह कदम देशव्यापी उस मुहिम का हिस्सा है जिसके तहत ब्रिटिशकालीन नामों को बदलकर भारतीय और सैन्य संस्कृति से जुड़े नाम दिए जा रहे हैं। बैठक में अध्यक्ष ब्रिगेडियर आरके सिंह और मुख्य अधिशासी अधिकारी अंकिता सिंह सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।

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क्लेमेनटाउन का 20वीं सदी से जुड़ा इतिहास

क्लेमेनटाउन का इतिहास 20वीं सदी की शुरुआत से जुड़ा है। इसका नाम फादर आरसी क्लेमेंट के नाम पर पड़ा था, जो 1934 में इस इलाके में आकर बसे थे। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस क्षेत्र का उपयोग इतालवी युद्ध बंदियों के शिविर के रूप में भी किया गया था। साल 1941 में इसे आधिकारिक तौर पर छावनी बोर्ड के तहत लाया गया, जिसके बाद से यह एक व्यवस्थित सैन्य क्षेत्र के रूप में विकसित होता गया।

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शिक्षा और पर्यटन का प्रमुख केंद्र

क्लेमेनटाउन केवल एक सैन्य छावनी ही नहीं, बल्कि शिक्षा और पर्यटन का भी बड़ा केंद्र माना जाता है। यहाँ स्थित बुद्धा टेम्पल पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। शांत वातावरण, प्रसिद्ध शिक्षण संस्थानों और अपनी विशिष्ट पहचान के कारण यह क्षेत्र लंबे समय से देहरादून के सबसे महत्वपूर्ण इलाकों में गिना जाता रहा है। अब अपनी इसी विरासत को यह नए नाम ‘शौर्य नगर’ के साथ आगे बढ़ाएगा।

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