PAU की नई जिंक फास्फाइड दवा: अब चूहों से 100% सुरक्षित रहेगी आपकी फसल

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पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के वैज्ञानिकों ने चूहों की समस्या से निपटने के लिए एक ‘रेडी-टू-यूज’ ड्यूल-कोटेड जिंक फास्फाइड चारा विकसित किया है। यह दवा पारंपरिक तरीकों के मुकाबले कहीं अधिक किफायती और प्रभावी है, जो फसलों को 70 से 100 प्रतिशत तक सुरक्षा प्रदान कर सकती है। डॉ. भूपिंदर कौर बब्बर के नेतृत्व में तैयार की गई यह दवा कम लागत में बेहतर परिणाम देती है, जिससे किसानों की आय और फसल की पैदावार दोनों में सुधार होने की उम्मीद है।

दवा की खासियत और काम करने का तरीका

यह दवा ‘ड्यूल-कोटेड’ तकनीक पर आधारित है, जिसमें जिंक फास्फाइड के कणों पर दो विशेष परतें चढ़ाई गई हैं। पहली परत दवा की कड़वाहट और गंध को छिपाती है ताकि चूहे इसे बिना किसी शक के आसानी से खा लें। दूसरी परत इसे नमी से बचाती है। जैसे ही चूहा इसे खाता है, उसके पेट में फास्फीन गैस बनती है, जिससे एक से दो घंटे के भीतर चूहे का खात्मा हो जाता है। खास बात यह है कि चूहों में इस दवा के प्रति कोई डर पैदा नहीं होता, जिससे इसे बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है।

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कम मात्रा और कम खर्च

इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता इसका कम खर्चीला होना है। एक हेक्टेयर खेत की फसल बचाने के लिए मात्र एक किलो दवा पर्याप्त है, जिसकी कीमत लगभग 100 रुपये है। यदि छोटे स्तर पर देखें, तो एक चूहे के बिल के लिए केवल 2 से 3 ग्राम दवा ही काफी होती है। यह दवा मिट्टी और पानी पर कोई बुरा प्रभाव नहीं डालती, जिससे यह पर्यावरण के लिहाज से भी एक सुरक्षित विकल्प है।

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इस्तेमाल के समय सावधानियां

चूँकि यह दवा जहरीली है, इसलिए इसका उपयोग बहुत सावधानी से किया जाना चाहिए। वैज्ञानिकों के अनुसार, इसे सीधे चूहों के बिल में डालना चाहिए या विशेष डिब्बों का उपयोग करना चाहिए। एक हेक्टेयर में लगभग 200 स्थानों पर 5-5 ग्राम दवा रखी जा सकती है। यदि बिल में पानी भरा हो, तो दवा डालने के बाद बिल बंद कर देना चाहिए ताकि गैस प्रभावी ढंग से काम कर सके। यह दवा अनाज के गोदामों, पोल्ट्री फार्म और घरों में भी उतनी ही कारगर है।