चम्पावत। उत्तराखंड के किसानों को खाद के लिए कॉपरेटिव सोसायटियों के बाहर घंटों लंबी कतारों में लगने और किल्लत से अब हमेशा के लिए निजात मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘डिजिटल इंडिया विजन‘ के तहत चम्पावत को पायलट डिस्ट्रिक्ट बनाते हुए खाद वितरण की पूरी व्यवस्था को 100% डिजिटल कर दिया गया है। सरकार के इस बड़े फैसले से जिले के हजारों किसानों को अब घर बैठे ही यूरिया और डीएपी की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।
राज्य सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और बिचौलियों से मुक्त बनाने के लिए ‘फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल’ नाम से एक नया ऐप आधारित सिस्टम लागू किया है। इसके जरिए खाद की कालाबाजारी पर पूरी तरह रोक लगेगी और समय पर आपूर्ति हो सकेगी।
कैसे काम करेगी यह नई डिजिटल व्यवस्था?
इस नई तकनीकी व्यवस्था के तहत किसानों को खाद खरीदने के लिए बेहद सरल प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके तहत अब किसान सबसे पहले अपने मोबाइल ऐप के माध्यम से घर बैठे ही अपनी जरूरत के अनुसार खाद की डिमांड ऑनलाइन दर्ज करेंगे।
जिसके बाद मांग दर्ज होते ही ऐप के जरिए किसान के मोबाइल पर एक यूनिक क्यूआर कोड जनरेट होगा। इस क्यूआर कोड को किसान अपनी स्थानीय सहकारी समिति के काउंटर पर दिखाएंगे और जैसे ही काउंटर पर कोड स्कैन होगा वैसे ही बिना किसी कागजी देरी के किसान को तुरंत खाद सौंप दी जाएगी।
शुरुआत में इस नई ऐप आधारित प्रणाली को लेकर चम्पावत के ग्रामीण इलाकों में किसानों के बीच थोड़ा भ्रम जरूर था। हालांकि, कृषि विभाग ने गांवों में कैंप लगाकर सभी शंकाओं का समाधान कर दिया है और अब किसान आसानी से ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं।
बटाईदारों और बुजुर्गों के लिए नियमों में बड़ी राहत
प्रशासन ने इस डिजिटल व्यवस्था को व्यावहारिक बनाने के लिए पात्रता के नियमों को काफी लचीला रखा है, ताकि कोई भी किसान खाद से वंचित न रहे। इस योजना का लाभ केवल वही किसान नहीं लेंगे जिनके नाम जमीन है, बल्कि दूसरों की जमीन पर खेती करने वाले भी इसके पात्र होंगे।
सहकारी समितियों के पंजीकृत सदस्य किसान अपनी सुविधा के अनुसार नगद या उधार पर खाद ले सकेंगे, जबकि गैर-पंजीकृत किसानों को नगद भुगतान पर तुरंत खाद मिलेगी। यदि कोई बुजुर्ग या शारीरिक रूप से असमर्थ किसान समिति तक नहीं पहुंच सकता, तो परिवार का कोई भी सदस्य ऐप में किसान का खसरा नंबर डालकर क्यूआर कोड जनरेट कर सकता है और खाद ला सकता है।
मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में पर्याप्त स्टॉक
कृषि विभाग ने जिले में खाद के न्यायसंगत वितरण के लिए प्रति हेक्टेयर का एक मानक तय किया है। इसके तहत किसानों को प्रति हेक्टेयर सात बोरी यूरिया और चार बोरी डीएपीया एनपीके खाद दी जाएगी। जिला प्रशासन के अनुसार, वर्तमान में चम्पावत में खाद का पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है।
टनकपुर और बनबसा जैसे मैदानी इलाकों के साथ-साथ लोहाघाट और चम्पावत के पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए एडवांस में खाद पहुंचा दी गई है, जिससे आने वाले दिनों में किसानों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

