‘साथ नहीं बह सकते खून और पानी’…चंद्रा नदी के पानी को व्यास बेसिन की ओर मोड़ेगा भारत

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पहलगाम आतंकी वारदात के बाद भारत ने तय कर दिया था कि उसके और पाक के बीच खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकता। लिहाजा भारत ने पानी रोकने की शुरूआत कर दी है। सिंधु जल समझौते को स्थगित करने के एक साल बाद अब भारत ने पाकिस्तान को जाने वाले अधिकतम पानी को रोकने के लिए दो बड़ी टनल परियोजनाओं की तैयारी की है। इनके पूरा होने पर पाकिस्तान को जाने वाला अतिरिक्त पानी हमेशा के लिए भारत रोक सकेगा और गंगा बेसिन में पहुंचाने का रास्ता भी बन जाएगा।

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पाकिस्तान जाने वाले अतिरिक्त पानी को भारत में ही रोकने के लिए लाहौल घाटी में चिनाब-व्यास लिंक परियोजना के तहत तकरबीन 2352 करोड़ रुपये की लागत से तकरीबनन 8.7 किलोमीटर लंबी टनल बनाई जाएगी ।जबकि चंद्रा नदी पर 19 मीटर ऊंचा बैराज बनाया जाएगा। जिसमें इकट्ठा हुए चंद्रानदी के पानी को हाइड्रोलिक स्ट्रक्चर और टनल की मदद से व्यास बेसिन की तरफ मोड़ा जाएगा।

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गौरतलब है कि सिंधु जल समझौते के तहत सिंधु बेसिन की छह नदियों में सिंधु, चिनाब और झेलम के पानी पर पाकिस्तान का 80 फीसदी अधिकार था। वहीं व्यास, रावी और सतलुज नदी के 80 फीसदी पानी को भारत इस्तेमाल कर सकता था।लेकिन पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इसे स्थगित कर दिया। पाकिस्तान को ज्यादा पानी देने वाली तीनों नदियों पर समझौते के चलते कई काम रुके पड़े थे। लेकिन अब नए प्लान के बाद तीनो नदियों के पानी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल हो सकेगा।

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हालांकि परियोजना कंप्लीट होने में टाइम लगेगा। केंद्र सरकार ने अपनी ओर से तो पानी रोकने का प्लान तैयार कर लिया है लेकिन कहा जाता है पानी को रोकना आसान नहीं होता वो अपना रास्ता खुद ही बना देता है। हां इतना तो तय है कि प्रोजेक्ट बन जाने के बाद पाकिस्तान को पानी उतनी रफ्तार से नहीं मिल पाएगा जितनी तेजी से अभी मिल रहा है।

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