बद्रीनाथ/देहरादून। विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में दान चोरी और वित्तीय हेराफेरी के मामले में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। बद्री-केदार मंदिर समिति के कुछ दागी कर्मचारियों ने मंदिर के खजाने को चूना लगाने के लिए VIP मेहमानों के नाम पर फर्जी बिल और वाउचर तैयार किए। हैरान करने वाली बात यह है कि जिन विशिष्ट अतिथियों ने धाम में ठहरने और खाने-पीने का अपना पूरा खर्च खुद अपनी जेब से उठाया था, कर्मचारियों ने उन्हीं के नाम पर फर्जी खर्चे दिखाकर मंदिर फंड से मोटी रकम उड़ा ली।
यह सनसनीखेज मामला तब सामने आया जब बीकेटीसी प्रशासन की आंतरिक जांच टीम ने धाम के विश्राम गृहों और VIP व्यवस्थाओं के रिकॉर्ड खंगाले। इस खुलासे के बाद मंदिर की साख और श्रद्धालुओं के दान की पवित्रता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के निर्देश पर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
ऐसे होता था भ्रष्टाचार का पूरा खेल
जांच रिपोर्ट के अनुसार, बद्रीनाथ धाम में हर साल देश-विदेश से बड़े नेता, उद्योगपति और उच्च अधिकारी दर्शन के लिए आते हैं। इनमें से कई वीआईपी मेहमान प्रोटोकॉल के बावजूद अपने भोजन, ठहरने और गाड़ियों का खर्च खुद नकद या डिजिटल माध्यम से चुकाते हैं। आरोपी कर्मचारियों ने इसी ईमानदारी को अपने भ्रष्टाचार का जरिया बना लिया।
जांच में यह भी सामने आया कि मेहमानों के जाने के बाद बही-खातों में दिखाया गया कि उनका पूरा खर्च मंदिर समिति (BKTC) ने उठाया था। तो वहीं, बाजार के लोकल वेंडरों और दुकानदारों से मिलकर वीआईपी भोजन, सत्कार और गाड़ियों के जाली बिल तैयार कराए गए। इन फर्जी बिलों को पास करवाकर कैश काउंटर और दान पेटी से आई नकद राशि को आपस में बांट लिया गया।
आंतरिक ऑडिट में खुली पोल, पकड़ी गई चोरी
इस पूरे वित्तीय घोटाले की भनक तब लगी जब मंदिर समिति के सालाना आंतरिक ऑडिट और स्टॉक वेरिफिकेशन के दौरान खर्चों में भारी विसंगतियां पाई गईं। जांच टीम ने जब कुछ वीआईपी दौरों के दौरान हुए खर्चों का मिलान उनके वास्तविक भुगतानों से किया, तो फर्जी बिलों का यह खेल खुलकर सामने आ गया। कई दुकानदारों के बिलों पर दर्ज सामग्री और वीआईपी को वास्तव में दी गई सुविधाओं में भारी अंतर मिला।
वहीं BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने रुख अपनाते हुए कहा कि बाबा बद्री विशाल के खजाने और भक्तों के दान पर डाका डालने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए कर्मचारियों को सस्पेंड करने के साथ ही उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई जा रही है।
अब पूरी व्यवस्था होगी डिजिटल, सीधे मुख्य सर्वर से जुड़ेंगे बिल
बद्रीनाथ धाम में फर्जी बिलिंग का यह नया मोड़ आने के बाद देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों और स्थानीय हक-हकूकधारियों में भारी आक्रोश है। श्रद्धालुओं का कहना है कि वे जिस आस्था से पाई-पाई जोड़कर मंदिर में चढ़ाते हैं, उसे कुछ भ्रष्ट कर्मी अपनी सुख-सुविधाओं के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। धाम में पहले भी दान पेटियों से नकदी गायब होने की शिकायतें आई हैं, लेकिन यह अपनी तरह का पहला संगठित फर्जीवाड़ा है।
इस घटना से सबक लेते हुए बीकेटीसी प्रशासन अब पूरे बिलिंग और बुकिंग सिस्टम को पूरी तरह से डिजिटल और फुलप्रूफ बनाने जा रहा है। आगामी दिनों में वीआईपी मेहमानों के ठहरने, खाने और उनके भुगतानों की रसीद सीधे मुख्य डिजिटल सर्वर से जोड़ी जाएगी। फिलहाल, जांच टीम अपनी अंतिम रिपोर्ट को अंतिम रूप दे रही है, जिसके बाद इस घोटाले में शामिल कुछ स्थानीय व्यापारियों और कर्मचारियों की गिरफ्तारी बिल्कुल तय मानी जा रही है।

