चिपको आंदोलन की प्रमुख स्तंभ बचनी देवी का 100 वर्ष की आयु में निधन, शोक की लहर

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टिहरी के चंबा क्षेत्र से एक दुखद समाचार सामने आया है। प्रसिद्ध ‘चिपको आंदोलन’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली पर्यावरण प्रेमी बचनी देवी का 100 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वे अदवाणी गांव की निवासी थीं और उन्होंने अपना पूरा जीवन जंगलों और पर्यावरण के संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया। उनके निधन से उत्तराखंड के पर्यावरण जगत और स्थानीय समाज में शोक की लहर दौड़ गई है।

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चिपको आंदोलन में ऐतिहासिक योगदान

बचनी देवी को उनके साहस और निडरता के लिए हमेशा याद रखा जाएगा। साल 1977 में जब हेंवलघाटी के अदवाणी क्षेत्र में जंगलों का व्यापारिक कटान बड़े पैमाने पर किया जा रहा था, तब उन्होंने इसके खिलाफ एक सशक्त विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था। उनके इस कड़े विरोध ने चिपको आंदोलन को एक नई ऊर्जा दी और जंगलों को बचाने में निर्णायक भूमिका निभाई।

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पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा

100 साल के अपने लंबे जीवन में बचनी देवी ने न केवल पेड़ों की रक्षा की, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाया। उनका जीवन इस बात का प्रतीक है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो एक अकेला व्यक्ति भी बड़े बदलाव की शुरुआत कर सकता है। उनका जाना उत्तराखंड के लिए एक अपूरणीय क्षति है।