उत्तराखंड के चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर स्थापित करते हुए देहरादून के दून मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में गंभीर हृदय और फेफड़े के रोगियों के लिए अत्याधुनिक जीवन रक्षक ‘ईकमो’ संजीवनी सुविधा की शुरुआत की गई है। अस्पताल की प्राचार्य डॉ. गीता जैन के अनुसार, ईकमो यानी एक्स्ट्राकॉर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन तकनीक मूल रूप से एक कृत्रिम हृदय और फेफड़े की तरह काम करती है।
यह जीवन रक्षक प्रणाली उस गंभीर स्थिति में इस्तेमाल की जाती है जब सामान्य इलाज और दवाओं के बावजूद मरीज का दिल या फेफड़े काम करना पूरी तरह बंद कर देते हैं। इस आधुनिक तकनीक के तहत मशीन सबसे पहले मरीज के शरीर से दूषित रक्त को बाहर निकालती है, फिर उसमें बाहर ही कृत्रिम रूप से ऑक्सीजन मिलाकर कार्बन डाइऑक्साइड को पूरी तरह साफ करती है और अंत में उस शुद्ध रक्त को वापस शरीर में पंप कर देती है, जिससे मरीज के डैमेज हो चुके अंगों को रिकवर होने का पर्याप्त समय मिल जाता है।
घातक रोद निदान में वरदान सिद्ध होगी आधुनिक चिकित्सा प्रणाली
यह अत्याधुनिक तकनीक चिकित्सा विज्ञान में उन मरीजों के लिए एक वरदान की तरह है जो कार्डियक अरेस्ट, कार्डियोजेनिक शॉक या फेफड़ों की गंभीर विफलता जैसी बेहद नाजुक और जानलेवा स्थितियों से जूझ रहे होते हैं। इस मशीन की मदद से फेफड़ों और दिल पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव पूरी तरह खत्म हो जाता है, जिससे क्रिटिकल केयर में वेंटिलेटर पर मौजूद मरीजों की बची हुई उम्मीदें भी कई गुना बढ़ जाती हैं। दून अस्पताल में इस तकनीक के आने से अब उत्तराखंड के स्थानीय गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को ऐसे गंभीर इलाज के लिए भारी-भरकम खर्च उठाकर अन्य बड़े राज्यों या निजी अस्पतालों की तरफ रुख नहीं करना पड़ेगा।
कार्डियोलॉजी विभाग में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती
अस्पताल प्रशासन ने इस जीवन रक्षक तकनीक को सुचारू रूप से संचालित करने और मरीजों की बढ़ती संख्या को संभालने के लिए बुनियादी ढांचे में भी बड़ा विस्तार किया है। प्राचार्य डॉ. गीता जैन के विशेष दिशा-निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए अस्पताल के निजी वार्ड-13 के 12 बिस्तरों को पूरी तरह से अपग्रेड करके कार्डियोलॉजी विभाग को आवंटित कर दिया गया है।
इसके साथ ही, इस संवेदनशील और उच्च स्तरीय मशीन की चौबीसों घंटे निगरानी के लिए तीन विशेषज्ञ हृदय रोग चिकित्सकों डॉ. सलिल गर्ग, डॉ. अमर उपाध्याय और डॉ. वत्सल को तैनात किया गया है, जो अपनी देखरेख में गंभीर मरीजों को यह एडवांस लाइफ सपोर्ट ट्रीटमेंट प्रदान करेंगे।

