देहरादून- रानीपोखरी में लॉ यूनिवर्सिटी के निर्माण का आंदोलन आज भी जारी है। ग्रामीण विश्वविद्यालय के निर्माण की मांग को लेकर लगातार धरना दे रहे हैं। धरना-प्रदर्शन लोकतांत्रिक तरीके से जारी है। ग्रामीण धरना स्थल पर पिछले डेढ दो महीने से हर रोज आ रहे हैं ताकि सरकार के कानो में उनकी मांग की गूंजती रहे। ग्रामीण अपने स्तर से हर संभव प्रयास कर रहे हैं ताकि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र रावत का सपना साकार हो सके।
दरअसल साल 2019 में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने अपनी विधानसभा क्षेत्र के रानीपोखरी गांव को लॉ विश्वविद्यालय का तोहफा दिया था। उसका शिलान्यास भी उन्होने किया था और विश्वविद्यालय को अमलीजामा पहनाया जा सके। लिहाजा उसके लिए 50 करोड़ रूपए भी जमा करवा दिए गए थे। लेकिन कुछ कानूनी अड़चनो और कोरोना महामारी ने विधि विश्वविद्यालय की राह में रोड़ा अटका दिया। हालांकि बाद में कानूनी अड़चन का रास्ता साफ हो गया और कोरोना महामारी भी खत्म हो गई। उम्मीद थी कि अब जल्द ही रानीपोखरी में विधि विश्वविद्यालय का ख्वाब पूरा होगा लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।
विधि विश्वविद्याल का आधारशिला रखने वाले सीएम त्रिवेंद्र रावत से ही भाजपा आलाकमान ने इस्तीफा मांग लिया। त्रिवेंद्र के इस्तीफा देते ही सब गुड़ गोबर हो गया। नई सरकार आई और रानीपोखरी के लॉ विश्वविद्यालय की फाइल अटक गई । बहरहाल जनता लगातार मांग कर रही है स्थानीय विधायक भी प्रयासों में जुटे हैं लेकिन आश्वसन के अलावा कुछ हाथ नहीं आ रहा ।
इधर लॉ विश्वविद्यालय की आधारशिला रखने वाले पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र रावत का कहना है कि उनकी दिली ख्वाहिश है कि रानीपोखरी में लॉ विश्वविद्यालय बने। इसके लिए वो मौजूदा सीएम से पत्रव्यवहार भी कर चुके हैं। त्रिवेद्र रावत कहते है लॉ यूनिवर्सिटी के लिए रखे गए पचास करोड रूपए की रकम अब ब्याज लगने के बाद और बड़ी हो गई होगी।लिहाजा मैं फिर कोशिश करूंगा ताकि जिस विधि विश्विद्यालय का रानीपोखरी में शिलान्यास हुआ था उसका लोकार्पण भी हो।

