उत्तराखंड के चमोली जिले के लोहाजंग में स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित 15 दिवसीय नेचुरलिस्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हो गया है। उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद और टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी स्किल काउंसिल के सहयोग से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का संचालन समर्पित मीडिया सोसायटी द्वारा किया गया।
समापन समारोह में वन क्षेत्राधिकारी श्री प्रदीप तौपाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की अपर निदेशक श्रीमती पूनम चन्द ने वर्चुअल माध्यम से जुड़कर युवाओं का उत्साहवर्धन किया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं के कौशल को निखारकर उन्हें पर्यटन गतिविधियों से सीधे जोड़ना है, ताकि वे आने वाले समय में पर्यटकों को एक सुरक्षित, ज्ञानवर्धक और बेहतर अनुभव प्रदान करने के साथ-साथ आत्मनिर्भर बन सकें।

युवाओं को मिला प्रकृति का व्यावहारिक ज्ञान
इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में लोहाजंग, देवाल और उसके आसपास के क्षेत्रों के 40 उत्साही युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। 15 दिनों के इस सफर में प्रतिभागियों को जैव विविधता, वन्यजीव संरक्षण, स्थानीय वनस्पतियों, पक्षियों की पहचान और प्रकृति व्याख्या कौशल जैसे पर्यावरण से जुड़े विषयों की विस्तृत जानकारी दी गई।
इसके साथ ही पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए उन्हें पर्यटक प्रबंधन, संचार कौशल, अतिथि सत्कार, प्राथमिक उपचार ) और जिम्मेदार पर्यटन के व्यावहारिक पहलुओं से भी अवगत कराया गया। चूंकि इनमें से अधिकांश प्रतिभागी पहले से ही ट्रैकिंग और गाइडिंग के काम में सक्रिय हैं, इसलिए इस प्रशिक्षण ने उनके जमीनी अनुभव और पारंपरिक ज्ञान को तकनीकी रूप से और अधिक मजबूत बना दिया है।
नेचर ट्रेल्स के भ्रमण से समझा क्षेत्र का प्राकृतिक वैभव
प्रशिक्षण को केवल थ्योरी तक सीमित न रखकर युवाओं को व्यावहारिक रूप से समझाने के लिए विभिन्न नेचर ट्रेल्स का प्रायोगिक भ्रमण भी कराया गया। इसके अंतर्गत सभी प्रशिक्षुओं को आजन टॉप, मंडोली नेचर ट्रेल और बांक गांव नेचर ट्रेल के मुख्य मार्गों पर ले जाया गया, जहाँ उन्होंने क्षेत्र की अनूठी जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधनों और ट्रैकिंग मार्गों का प्रत्यक्ष अध्ययन किया।
इस मैदानी अनुभव के जरिए युवाओं ने प्रकृति आधारित पर्यटन की बारीकियों को समझा और यह सीखा कि कैसे वे बाहरी क्षेत्रों से आने वाले पर्यटकों को उत्तराखंड की प्राकृतिक धरोहर से बेहतर तरीके से रूबरू करा सकते हैं। समारोह के अंत में सभी सफल प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए और वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि यह कोर्स सिर्फ एक सर्टिफिकेट लेने का जरिया नहीं है, बल्कि स्थानीय युवाओं को अपनी संस्कृति और संसाधनों से जोड़ने का माध्यम है।
मजबूत कड़ी बनेंगे प्रशिक्षित युवा
मुख्य अतिथि श्री प्रदीप तौपाल ने कहा कि ये प्रशिक्षित नेचुरलिस्ट आने वाले समय में वन विभाग और स्थानीय जनता के बीच सामंजस्य बिठाने वाली एक बेहद महत्वपूर्ण कड़ी साबित होंगे। कार्यक्रम के समापन पर सभी ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि भविष्य में वन विभाग, स्थानीय समुदाय और ये युवा मिलकर लोहाजंग क्षेत्र में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना जिम्मेदार पर्यटन को आगे बढ़ाएंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार व स्वरोजगार के नए रास्ते खोलेंगे।

