देहरादून। उत्तराखंड में नई सड़कों के निर्माण और डामरीकरण के लिए अब प्लास्टिक और पुराने डामर का व्यापक उपयोग किया जाएगा। सड़कों के निर्माण को पर्यावरण के अनुकूल बनाने और सरकारी बजट की बचत करने के उद्देश्य से लोक निर्माण विभाग नई नीति तैयार कर रहा है।
वर्तमान में डामरीकरण के लिए विटमिन और इमल्शन का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें काफी ईंधन खर्च होता है और कार्बन मोनोऑक्साइड व कार्बन डाइऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें निकलती हैं। इस प्रदूषण से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए अब राज्य में पुरानी सड़क के डामर को उखाड़कर उसे रिसाइकिल करने और प्लास्टिक का उपयोग करने पर जोर दिया जा रहा है।
क्या है ‘फुल डेप्थ रिक्लमेशन’ तकनीक?
सड़कों के कायाकल्प के लिए ‘फुल डेप्थ रिक्लमेशन’ (Full Depth Reclamation) तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। यह एक ऐसी आधुनिक प्रक्रिया है जिसमें पुरानी सड़क को उखाड़े बिना उसकी सामग्री को दोबारा इस्तेमाल किया जाता है।
एक भारी मशीन पुरानी सड़क की सतह पर चलकर डामर, कंक्रीट और बेस लेयर को बारीक टुकड़ों में पीस देती है। इसके बाद इसमें सीमेंट, चूना, फ्लाई ऐश या इमल्सीफाइड डामर मिलाकर बेहद मजबूत सड़क तैयार की जाती है।
कम बजट में बनेगी मजबूत सड़क: लोनिवि HOD। लोनिवि के विभागाध्यक्ष राजेश शर्मा ने बताया कि डामरीकरण के लिए नई तकनीकों का प्रयोग शुरू किया जा रहा है। इसका मुख्य मकसद सड़क निर्माण को कम बजट में और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। नई तकनीक से सड़कों का निर्माण तेजी से होगा और पैसों की भी बचत होगी।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में हर साल करीब 1000 किलोमीटर सड़कों का डामरीकरण किया जाता है, जिसमें विभाग का एक बड़ा बजट खर्च होता है। लोनिवि द्वारा इस नई नीति की प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में हैं, जिससे जल्द ही धरातल पर काम शुरू होने की उम्मीद है।

