केदारघाटी के युवा बनेंगे प्रकृति के दूत, शुरू हुआ विशेष नेचुरलिस्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम

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उत्तराखंड की केदारघाटी में स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने और पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाने के लिए एक बेहद अनूठा और सराहनीय प्रयास शुरू किया गया है। उत्तराखंड सरकार और पर्यटन एवं आतिथ्य कौशल परिषद के संयुक्त तत्वावधान में अगस्त्यमुनि के क्रौंच हिल्स में पहली बार एक विशेष नेचुरलिस्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ है।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं को उनके ही क्षेत्र के जंगलों, पहाड़ों, नदियों, पक्षियों, लोककथाओं और प्राकृतिक धरोहर की गहरी व सही जानकारी देना है ताकि वे आने वाले पर्यटकों का बेहतर मार्गदर्शन कर सकें। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि वरिष्ठ भाजपा नेता अनूप सेमवाल ने कहा कि यदि युवा अपने क्षेत्र की सही जानकारी सीख लें, तो वे पर्यटन के जरिए स्वरोजगार के बेहतरीन अवसर पैदा कर सकते हैं।

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वहीं वरिष्ठ पत्रकार हरीश गुसाईं ने युवाओं को देवरियाताल जैसे कम चर्चित नेचर ट्रेल्स और केदारनाथ की रोचक लोककथाओं से परिचित कराते हुए अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की बात कही। ऑनलाइन माध्यम से जुड़ीं पर्यटन विभाग की अपर निदेशक पूनम चंद ने भी अगस्त्यमुनि क्षेत्र को ट्रेकिंग और एडवेंचर के लिए बेहद उपयुक्त बताते हुए युवाओं को इन स्थानों को व्यावहारिक रूप से समझने की सलाह दी।

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व्यापार मंडल के अध्यक्ष त्रिभुवन सिंह नेगी और भाजपा नेता उमेश चंद्र कांडपाल ने भी इस पहल को स्थानीय पर्यटन को मजबूत करने और युवाओं को नई दिशा देने वाला बताया।समर्पित मीडिया सोसायटी द्वारा संचालित किए जा रहे इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की सबसे खास बात यह है कि यह केवल किताबी या कक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें युवाओं को फील्ड में ले जाकर व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा।

इस कोर्स के दौरान युवाओं को पक्षियों की पहचान करने, स्थानीय जैव विविधता को समझने, प्रकृति की व्याख्या करने, ट्रेकिंग मार्गों की मैपिंग और पर्यटकों के साथ बेहतर संवाद करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर कुशल प्रशिक्षकों द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा।कार्यक्रम के संचालक पंकज शर्मा ने बताया कि इस पूरी मुहिम का असल मकसद स्थानीय युवाओं को प्रकृति आधारित पर्यटन से जोड़कर भविष्य के लिए आत्मनिर्भर बनाना है।

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इस ट्रेनिंग को पूरा करने के बाद ये युवा न केवल कुशल गाइड और नेचुरलिस्ट के रूप में पर्यटकों का मार्गदर्शन करेंगे, बल्कि केदारघाटी की अनूठी प्रकृति, जीवंत संस्कृति और समृद्ध लोकजीवन को देश-दुनिया के सामने एक नए और पेशेवर अंदाज में पेश करने का काम भी करेंगे, जिससे क्षेत्र में जिम्मेदार और टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

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