उत्तराखंड में जनता को पानी पिलाने के लिए हर साल 550 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम बिजली खर्च हो रही है, जिसके वित्तीय भार को कम करने के लिए अब सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। जल निगम और जल संस्थान ने अपने पेयजल सप्लाई सिस्टम के तहत संचालित होने वाले ट्यूबवेल, लिफ्टिंग और पंपिंग योजनाओं को अब सोलर पावर से जोड़ने की पूरी तैयारी कर ली है और इसके लिए कंपनियों से आवेदन भी मांग लिए गए हैं।
आंकड़ों की बात करें तो जल संस्थान के ब्योरे में 1184 ट्यूबवेल, 405 पेयजल लिफ्टिंग योजनाएं और 43 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट शामिल हैं, जबकि जल निगम की योजनाओं में 1125 ट्यूबवेल, 250 पेयजल लिफ्टिंग योजनाएं और 22 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट सक्रिय हैं, जिन्हें योजनावार तरीके से सोलर प्लांट से लैस किया जाएगा।
इस पूरी रणनीति का मुख्य उद्देश्य दिन के समय खर्च होने वाली बिजली के भार को सौर ऊर्जा के साथ साझा करना है, ताकि दोपहर के समय इन सभी पेयजल योजनाओं का संचालन पूरी तरह सोलर पावर प्लांट के जरिए किया जा सके।
सचिव पेयजल रणवीर सिंह चौहान ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि पेयजल योजनाओं के संचालन में लगातार बढ़ते बिजली खर्च को नियंत्रित करने के लिए ही यह महत्वपूर्ण प्रयास किया जा रहा है, जिससे न केवल बिजली की बचत होगी बल्कि सीधे तौर पर राज्य सरकार के राजस्व पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ भी काफी हद तक कम हो जाएगा।

