Uttarakhand: पलायन रोकने और रोजगार सृजन के लिए ‘उत्तराखंड राज्य सहकारिता नीति 2026’ का ऐलान

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देहरादून। उत्तराखंड शासन के सहकारिता विभाग ने केंद्र सरकार की ‘राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025’ की तर्ज पर राज्य में ‘उत्तराखंड राज्य सहकारिता नीति, 2026’ प्रख्यापित करने का बड़ा निर्णय लिया है। सहकारिता विभाग के सचिव डॉ. अहमद इकबाल द्वारा 15 जून 2026 को जारी प्रेस नोट के अनुसार, यह नीति राज्य की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार की गई है, जो सहकारी संस्थाओं को पारदर्शी, उत्तरदायी और तकनीकी रूप से सक्षम बनाएगी।

केंद्र सरकार द्वारा 24 जुलाई 2025 को ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन और ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य के साथ राष्ट्रीय नीति का अनावरण किया गया था। उसी परिप्रेक्ष्य में तैयार यह राज्य नीति संस्थाओं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ कृषि, मूल्य-श्रृंखला विकास, महिला व युवा सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन को रोकने की दिशा में ठोस काम करेगी।

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इस ‘उत्तराखंड राज्य सहकारिता नीति 2026’ के अंतर्गत राज्य की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए 7 मुख्य रणनीतिक मिशन स्तंभ तय किए गए हैं। पहले स्तंभ ‘नींव का सशक्तिकरण’ के तहत सहकारिता की कानूनी और प्रशासनिक बुनियाद को मजबूत कर समितियों को स्वायत्तता, पारदर्शिता और सुगम संचालन प्रदान किया जाएगा।

दूसरे स्तंभ ‘जीवंतता को प्रोत्साहन’ के माध्यम से निष्क्रिय ऋण समितियों को आय-सृजनकारी, प्रतिस्पर्धी और बहुउद्देश्यीय ग्रामीण व्यवसाय केंद्रों में तब्दील किया जाएगा। तीसरे स्तंभ ‘भविष्य के लिए तैयारी’ का लक्ष्य समितियों को डिजिटल, पेशेवर, बाज़ारोन्मुख और जलवायु व तकनीकी परिवर्तनों के अनुकूल बनाना है, जबकि चौथे स्तंभ ‘समावेशिता और पहुँच का विस्तार’ के जरिए महिलाओं, युवाओं, वंचित वर्गों और दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों को सीधे निर्णय-प्रक्रिया और लाभ से जोड़ा जाएगा।

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इसके अलावा, पांचवें स्तंभ ‘नए व उभरते क्षेत्रों में प्रवेश’ के तहत सहकारिता को पारंपरिक खेती से आगे ले जाकर प्राकृतिक खेती, हरित ऊर्जा, जड़ी-बूटी, पर्यटन, कार्बन क्रेडिट, ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में विस्तारित किया जाएगा। छठे स्तंभ ‘युवा पीढ़ी की भागीदारी’ में युवाओं को प्रशिक्षण, कौशल विकास, उद्यमिता, इंटर्नशिप और दीर्घकालिक करियर विकल्प देकर भविष्य का सहकारी नेतृत्व तैयार करने पर जोर दिया गया है।

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अंतिम और सातवें स्तंभ ‘आर्थिक व्यवहार्यता व विविधीकरण’ के तहत संस्थाओं को वित्तीय रूप से लाभकारी, बैंक-योग्य और विविध व्यवसायों से जुड़ी टिकाऊ इकाइयों के रूप में विकसित किया जाएगा। ये सातों स्तंभ ढांचागत सुधार, आधुनिकता, सामाजिक समावेशिता, मानव संसाधन निर्माण और आर्थिक टिकाऊपन सुनिश्चित करते हैं, जिससे नीति लागू होने पर प्रदेश के किसानों, युवाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

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