उत्तराखंड में मानसूनी आफत: भूस्खलन से 38 प्रमुख रास्ते बंद, देखें अपने जिले का हाल

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देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही मानसूनी आफत के बीच भूस्खलन ने एक बार फिर जनजीवन और यातायात की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भारी भूस्खलन के चलते रविवार को भी यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा और स्टेट हाईवे से लेकर मुख्य जिला मार्ग व ग्रामीण सड़कों समेत कुल 38 मार्ग बंद हो गए हैं। इस आपदा का सीधा असर पहाड़ी क्षेत्रों के स्थानीय निवासियों और मुसाफिरों पर पड़ रहा है।

सड़कों के बंद होने और पहाड़ी से लगातार मलबा गिरने के कारण पूरे प्रदेश की परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र देहरादून से प्राप्त आधिकारिक रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि मलबे की चपेट में आने से केवल ग्रामीण संपर्क मार्ग ही नहीं, बल्कि राज्य के कई महत्वपूर्ण लाइफलाइन कहे जाने वाले स्टेट हाईवे भी पूरी तरह अवरुद्ध हो गए हैं।

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जिलावार बंद सड़कों के आधिकारिक आंकड़े

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा की मार झेलने में सीमांत जिला पिथौरागढ़ सबसे आगे रहा है, जहां अकेले ही 13 महत्वपूर्ण सड़कें मलबे के कारण बंद हैं। वहीं देहरादून नंबर 2 पर है जहां कुल 7 मार्ग पूरी तरह बाधित हैं। जबकि चमोली जिले के 6 प्रमुख मार्ग और बागेश्वर जिले के कुल 5 सड़कें मलबे से अवरुद्ध हैं। इसके अतिरिक्त टिहरी जिले के 5, रुद्रप्रयाग की 1 और अल्मोड़ा जिले की भी 1 मुख्य मार्ग बाधित है।

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लोक निर्माण विभाग अलर्ट मोड पर

इन मार्गों के बंद होने से विशेषकर पिथौरागढ़, चमोली और टिहरी के सीमावर्ती व ग्रामीण इलाकों का संपर्क जिला मुख्यालयों से पूरी तरह कट गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं के लिए भी संघर्ष करने को मजबूर हैं।

बंद सड़कों को तत्काल प्रभाव से खोलने और यातायात को बहाल करने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीमें युद्धस्तर पर प्रयास कर रही हैं। संवेदनशील स्थानों पर जेसीबी और भारी पोकलैंड मशीनें तैनात की गई हैं, ताकि जैसे ही पहाड़ी से बोल्डर गिरना बंद हो, मलबे को तुरंत हटाकर रास्ता साफ किया जा सके।

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इस समय उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मौसम के मिजाज और भूस्खलन की संवेदनशीलता को देखते हुए आपातकालीन परिचालन केंद्र ने यात्रियों से अपील की है कि वे बेहद जरूरी होने पर ही यात्रा करें और संबंधित जिलों के प्रशासनिक कंट्रोल रूम से सड़कों की ताजा स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही घर से निकलें।

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