देहरादून। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने देहरादून की दून घाटी में 7,000 पेड़ों के कटान और पहाड़ियों की तलहटी में हो रहे अवैध निर्माण पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, राज्य सरकार, मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण और उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड से जवाब तलब किया है।
हाईकोर्ट ने सड़क निर्माण के लिए पेड़ों के कटान के मामले में केंद्र और राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। वहीं याचिकाकर्ता को दो सप्ताह में अपना प्रति-उत्तर जमा करना होगा। इसके अलावा, पहाड़ियों की तलहटी में अवैध निर्माण के मामले में एमडीडीए और जैव विविधता बोर्ड को एक सप्ताह के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।
अदालत में दायर जनहित याचिका में याचिकाकर्ता रेनू पाल ने बताया कि यमुना वैली और आसारोड़ी-झाझरा क्षेत्र के बीच एनएचएआई द्वारा ग्रीन प्रोजेक्ट के तहत सड़क निर्माण प्रस्तावित है। इसके लिए करीब सात हजार पेड़ों को काटा जाना है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इतनी बड़ी परियोजना शुरू करने से पहले उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड से कानूनन जरूरी अनुमति तक नहीं ली गई है।
याचिका में अदालत को अवगत कराया गया कि 7,000 पेड़ों की कटाई से स्थानीय पर्यावरण, वन्यजीवों और जल स्रोतों पर विनाशकारी असर पड़ेगा। यह पूरा इलाका हाथियों का बफर जोन है और यहां पक्षियों की 300 से अधिक दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। इसके अलावा, पास स्थित आसन बैराज में हर साल विभिन्न देशों से हजारों प्रवासी पक्षी आते हैं, जिनके अस्तित्व पर संकट मंडराने लगेगा।
वहीं, वर्ष 2021 से लंबित एक अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने देहरादून के संवेदनशील ढलानों पर हो रहे अवैध निर्माणों पर भी शिकंजा कसा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि 30 डिग्री से अधिक ढलान वाले भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में बिना समुचित जांच और अनुमति के बड़े पैमाने पर व्यावसायिक व आवासीय निर्माण कर दिए गए हैं।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने माना कि पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील पहाड़ियों पर बिना तकनीकी जांच के निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने निर्देश दिया है कि संवेदनशील क्षेत्रों में जारी निर्माण कार्यों पर तुरंत प्रभावी रोक लगाई जाए और दून घाटी के प्राकृतिक संतुलन को बचाने के लिए इन इलाकों का नियमित निरीक्षण किया जाए।

