Uttarakhand: कोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखाना पड़ा भारी! IFS अफसर समेत 3 को थमाया अवमानना नोटिस

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नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वन एवं पर्यावरण विभाग में अदालती आदेश की अनदेखी पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने विभाग के प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, संयुक्त सचिव मुकेश कुमार राय और तत्कालीन प्रमुख मुख्य वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्रा को अवमानना नोटिस जारी किया है।

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने यह बड़ा आदेश आईएफएस अधिकारी पंकज कुमार की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। अदालत ने इन तीनों शीर्ष अधिकारियों से तीन सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है।

एकलपीठ ने तीनों अफसरों को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने पर उनके खिलाफ क्यों न अवमानना की कार्यवाही चलाई जाए? इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को तय की गई है।

क्या है पूरा मामला और क्यों आया कोर्ट को गुस्सा?

आईएफएस अधिकारी पंकज कुमार ने आरोप लगाया था कि उनका प्रशासनिक स्थानांतरण नियमों और निर्धारित समय से पहले किया जा रहा है। इसके खिलाफ उन्होंने उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 4 सितंबर 2025 को याचिकाकर्ता को अंतरिम संरक्षण दिया था।

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अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में साफ निर्देश दिए थे कि मामले में याचिकाकर्ता की कार्यमुक्ति या स्थानांतरण पर रोक रहेगी। इस स्थगन आदेश को हाईकोर्ट ने बाद में 10 सितंबर 2025 और फिर 31 मार्च 2026 को भी लगातार विस्तार देते हुए जारी रखा था।

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डिजिटल सिग्नेचर से जारी हुआ ट्रांसफर लेटर

याचिकाकर्ता का आरोप है कि हाईकोर्ट के इस स्पष्ट आदेश के बावजूद संयुक्त सचिव मुकेश कुमार राय के डिजिटल हस्ताक्षर से एक नया स्थानांतरण आदेश जारी कर दिया गया। इस नए आदेश के तहत पंकज कुमार को उनके वर्तमान पद से हटा दिया गया।

नए आदेश में उन्हें वन संरक्षक दक्षिणी कुमाऊं वृत्त नैनीताल और क्षेत्रीय प्रबंधक उत्तराखंड वन विकास निगम रामनगर का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया, जो सीधे तौर पर अदालती आदेश का उल्लंघन था।

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शासन ने नहीं लिया संज्ञान, तो खटखटाया कोर्ट का दरवाजा

इस नए ट्रांसफर ऑर्डर की जानकारी मिलते ही आईएफएस पंकज कुमार ने तत्काल शासन स्तर पर एक प्रत्यावेदन भेजा। उन्होंने अधिकारियों को इस न्यायिक स्थगन आदेश की याद दिलाई और ट्रांसफर रोकने का अनुरोध किया। जब शासन स्तर पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया, तब याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में Uttarakhand High Court Contempt Notice के लिए अवमानना याचिका दायर की। कोर्ट ने अब इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए तीनों शीर्ष अधिकारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

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