देहरादून। उत्तराखंड राज्योत्सव कार्यक्रम के मंच से देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लगाए गए तीखे आरोपों पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने जोरदार पलटवार किया है। अमित शाह ने अपने संबोधन के दौरान पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ‘जुमे की छुट्टी’ देने, व्यापक भ्रष्टाचार करने और सचिवालय को कमीशनखोरी का अड्डा बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इन बयानों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए हरीश रावत ने अमित शाह को खुली चुनौती दे डाली है कि यदि कांग्रेस सरकार के समय जुमे की छुट्टी का कोई एक भी सरकारी आदेश या किसी घोटाले का प्रमाण पेश कर दिया जाए, तो वह तत्काल राजनीति से संन्यास ले लेंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री ने राजधानी देहरादून में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए स्पष्ट कहा कि भाजपा नेता बिना किसी तथ्य के झूठ फैलाकर जनता को गुमराह कर रहे हैं। हरीश रावत ने ऐलान किया कि अगर अमित शाह या भाजपा का कोई भी नेता उनके कार्यकाल में जुमे की छुट्टी देने का एक भी आधिकारिक दस्तावेज सामने ला दे, तो वह न केवल राजनीति छोड़ देंगे बल्कि राज्य और देश की जनता से हाथ जोड़कर सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगेंगे।
केंद्रीय गृह मंत्री के आरोपों पर तीखा हमला बोलते हुए पूर्व सीएम ने वर्तमान भारतीय जनता पार्टी की राज्य सरकार की नीयत और कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के मंत्री बहुत ‘सेवाभाव’ से काम कर रहे हैं। हरीश रावत ने हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि सत्ताधारी पार्टी के ही एक मंत्री के पति ने यह स्वीकार किया है कि उनके पास 210 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जबकि राजनीति में आने से पहले उनके पास केवल साड़ी और चप्पल ही थी।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए हरीश रावत ने एक अन्य कैबिनेट मंत्री का उदाहरण भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि एक कैबिनेट मंत्री पर आय से अधिक संपत्ति का मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच के आदेश तक जारी कर दिए थे। लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार ने अपने मंत्री को बचाने के लिए सीबीआई को जांच की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा सरकार के समय हुए घोटालों की गिनती शुरू की जाए, तो भाजपा के हर कार्यालय से किसी न किसी घोटाले का तार जुड़ा हुआ मिलेगा।
अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल की उपलब्धियों की पैरवी करते हुए हरीश रावत ने कहा कि 2013 की भीषण दैवीय आपदा के बाद केवल कांग्रेस सरकार ने ही उत्तराखंड को तबाही के मंजर से बाहर निकाला था। उन्होंने कहा कि तत्कालीन सरकार ने ही राज्य की ध्वस्त हो चुकी अर्थव्यवस्था को पुनः पटरी पर लाने का काम किया था। उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों, पारम्परिक व्यंजनों, परिधानों, आभूषणों, हस्तशिल्प और लोककला को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए कई योजनाएं शुरू की गई थीं।
पूर्व सीएम ने कहा कि आज कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई उन्हीं जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ लाखों उत्तराखंडवासी उठा रहे हैं। आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने राज्य की नकारात्मक विकास दर को सुधारकर 14 प्रतिशत वार्षिक विकास दर तक पहुंचाया था। इसके अलावा, बेरोजगार दर की वृद्धि को घटाकर 1.5 प्रतिशत से भी नीचे लाने का ऐतिहासिक काम कांग्रेस सरकार के दौरान ही संभव हुआ था।
राज्योत्सव जैसे बड़े और राजकीय मंच से शुरू हुई यह राजनीतिक जंग अब उत्तराखंड में पूरी तरह से गर्मा चुकी है। कांग्रेस खेमे द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री को दी गई इस सीधी और खुली चुनौती के बाद सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के अगले कदम और आधिकारिक बयान पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं।

